जालना। जिले में सूखे की स्थिति को लेकर कांग्रेस लगातार आंदोलन कर रही थी। अब महाराष्ट्र सरकार की ओर से राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे अपने आंदोलन का परिणाम बताया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष कल्याणराव दळे ने दावा किया कि पार्टी के लगातार आंदोलन और दबाव के बाद सरकार को सूखा घोषित करने का फैसला लेना पड़ा। सरकार के आधिकारिक फैसले के मुताबिक जालना जिले के सभी आठ तालुका भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल हैं। citeturn0search2turn0search3
हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ सूखा घोषित करने से किसानों की परेशानी खत्म नहीं होगी। पार्टी ने किसानों, खेत मजदूरों, विद्यार्थियों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक राहत की मांग की है। यह खबर कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस नोट में किए गए दावों और मांगों पर आधारित है।
पहले ज्ञापन, फिर बैलगाड़ी और ट्रैक्टर मार्च
कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, सांसद डॉ. कल्याणराव काले और जिलाध्यक्ष कल्याणराव दळे के नेतृत्व में जालना जिला कांग्रेस कमेटी ने पहले जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर जिले में सूखा घोषित करने की मांग की थी। इसके बाद जाफराबाद और मंठा में किसानों का बैलगाड़ी मार्च, जबकि परतूर में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। इन आंदोलनों के जरिए सरकार से जल्द सूखा घोषित करने और किसानों को राहत देने की मांग की गई।
15, 23 और 24 सितंबर को सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा
कांग्रेस ने सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए जिले के अलग-अलग तालुकों में सूखा स्थिति का जायजा लिया। पार्टी के अनुसार, 15, 23 और 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों का दौरा किया। इस दौरान तहसीलदारों और उपविभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल राहत देने की मांग की गई।
कांग्रेस का दावा है कि इन लगातार आंदोलनों के कारण सरकार पर दबाव बना और इसके बाद सूखा घोषित किया गया। हालांकि, सरकार के 26 सितंबर के फैसले के अनुसार सूखा घोषणा कृषि आयुक्त की 24 सितंबर की रिपोर्ट और सूखा प्रबंधन संहिता के Trigger-I मानकों के आकलन पर आधारित है। citeturn0search2turn0search6
‘सिर्फ सूखा घोषित करना काफी नहीं’
कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सूखा घोषित करना किसानों की समस्या का पूरा समाधान नहीं है। पार्टी के मुताबिक, मौजूदा घोषणा से किसानों और दूसरे सूखा प्रभावित लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिलेगी।
हेक्टेयर के हिसाब से 75 हजार रुपये सहायता की मांग
कांग्रेस ने NDRF के नुकसान भरपाई मानकों में बदलाव कर किसानों को प्रति हेक्टेयर 75 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके साथ ही फल बागान किसानों और पशुपालकों को पर्याप्त मदद, विद्यार्थियों को निर्वाह भत्ता, एक रुपये में फसल बीमा योजना लागू करने तथा किसानों और खेत मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी की मांग भी की गई है।
5 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय पर आक्रोश मोर्चा
कांग्रेस जिलाध्यक्ष कल्याणराव दळे के मुताबिक, यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो 5 अक्टूबर 2026 को जालना जिलाधिकारी कार्यालय पर आक्रोश मोर्चा निकाला जाएगा। इस मोर्चे में किसान, खेत मजदूर, विद्यार्थी और पशुपालकों के शामिल होने का दावा कांग्रेस ने किया है। पार्टी ने कहा है कि इसके बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
‘मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा’
सांसद डॉ. कल्याणराव काले ने सरकार के सूखा संबंधी आदेश को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदेश में सूखे से प्रभावित सभी वर्गों को राहत देने की स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती। काले के मुताबिक, किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, प्रति हेक्टेयर 75 हजार रुपये की आर्थिक मदद और फसल बीमा की राशि किसानों के खातों में जमा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपाय घोषित किए
राज्य सरकार की घोषणा में फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि संबंधी ऋण की वसूली स्थगित करने, जमीन के राजस्व में रियायत और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं। जरूरत के अनुसार पानी के टैंकर, चारा और खाद्यान्न की व्यवस्था तथा ग्रामीण रोजगार योजना में राहत देने का भी प्रावधान है। फसल नुकसान का आकलन करने के लिए जिलाधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। citeturn0search3turn0search4
जालना और महाराष्ट्र की सूखे से जुड़ी अन्य खबरों के लिए NewsNationOnline का जालना समाचार सेक्शन और महाराष्ट्र समाचार सेक्शन देखें। जिले से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं के लिए जालना जिला प्रशासन की वेबसाइट तथा मौसम और आपदा संबंधी जानकारी के लिए महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट देखी जा सकती है।
नोट: कांग्रेस के आरोप और मांगें पार्टी के प्रेस नोट के आधार पर प्रकाशित की गई हैं। सरकार द्वारा जारी सूखा घोषणा और राहत उपायों की जानकारी स्वतंत्र आधिकारिक/विश्वसनीय स्रोतों से जोड़ी गई है।

