Atrocities on minorities in Bangladesh: Raza Academy raised voice, demanded security and peace
मुंबई, 9 दिसंबर 2024
रज़ा अकादमी, एक प्रमुख सामाजिक और धार्मिक संगठन, जो 1978 में मुंबई में स्थापित हुआ और जिसकी शाखाएं भारत के विभिन्न राज्यों में फैली हुई हैं, ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में रज़ा अकादमी ने बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा और अत्याचार न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं के भी विपरीत है। भारत, जिसने बांग्लादेश की आज़ादी में अहम भूमिका निभाई है, इस स्थिति से गहरा आहत है।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
- 1. अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार तुरंत बंद हों: रज़ा अकादमी ने कहा कि अल्पसंख्यकों की जान-माल और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार और बहुसंख्यक समुदाय की जिम्मेदारी है।
- 2. मुआवजे और पुनर्वास की मांग: दंगों में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए, घायलों का उपचार सुनिश्चित किया जाए और नष्ट किए गए घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण किया जाए।
- 3. भविष्य की गारंटी: सरकार यह सुनिश्चित करे कि ऐसी घटनाएं दोबारा कभी न हों।

रज़ा अकादमी ने इस घटना को पिछले 50 वर्षों में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार दिया है।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेता:
सय्यद मोइनुद्दीन अशरफ (अध्यक्ष, ऑल इंडिया सुन्नी जमीअत-उल-उलेमा)
एम. सईद नूरी (अध्यक्ष, रज़ा अकादमी)
मौलाना एजाज़ कश्मीरी
क़ारी अब्दुल रहमान ज़ियाई
मौलाना खलीलुर रहमान
मौलाना अब्बास रज़वी

रज़ा अकादमी का बयान:
संगठन ने बांग्लादेश सरकार से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और शांति की बहाली से ही बांग्लादेश का सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा मजबूत रहेगा।

रज़ा अकादमी ने आशा जताई है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को जल्द से जल्द रोका जाएगा।
