NewsNation Online

FireFly In News

चीनी में माइक्रोप्लास्टिक चेतावनी पर FSSAI की समीक्षा मांग, हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल

News collage showing FSSAI logo, sugar, magnifying glass on sugar crystals; headline in Hindi about microplastics in sugar and court order.

नई दिल्ली/चेन्नई। पैकेज्ड चीनी, नमक और बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की संभावित मौजूदगी को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश की समीक्षा की मांग की है, जिसमें इन उत्पादों पर माइक्रोप्लास्टिक की संभावित मौजूदगी को लेकर उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी देने का निर्देश दिया गया था।

FSSAI का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी निर्णायक नहीं हैं। प्राधिकरण के मुताबिक अनिवार्य चेतावनी से पहले इस विषय पर और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है।

क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश?

मद्रास हाईकोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को पैकेज्ड पानी, प्लास्टिक पैकेट में बिकने वाली चीनी और नमक को लेकर माइक्रो तथा नैनोप्लास्टिक की संभावित मौजूदगी पर चिंता जताई थी। अदालत ने इन उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी देने का निर्देश दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित चेतावनी में उपभोक्ताओं को बताया जाना था कि संबंधित पानी, चीनी या नमक में माइक्रो/नैनो प्लास्टिक हो सकता है।

FSSAI ने समीक्षा क्यों मांगी?

FSSAI ने अपनी समीक्षा याचिका में कहा है कि माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों को लेकर दुनिया भर में शोध जारी है, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी निर्णायक नहीं हैं। कुछ अध्ययनों में संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की बात सामने आई है, पर खाद्य पदार्थों में मौजूद इन कणों के स्तर से मानव स्वास्थ्य को निश्चित खतरा होने का निष्कर्ष अभी स्पष्ट नहीं है।

प्राधिकरण ने यह भी आशंका जताई है कि अनिवार्य चेतावनी से उपभोक्ताओं में अनावश्यक डर पैदा हो सकता है और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

ICMR और IIT मद्रास से अध्ययन की पहल

FSSAI ने बताया कि उसने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से माइक्रोप्लास्टिक पर आगे अध्ययन कराने के लिए संपर्क किया है। प्राधिकरण के अनुसार ICMR को दो बार पत्र भेजे गए, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है। FSSAI ने प्रस्तावित अध्ययन के लिए वित्तीय मदद देने की पेशकश भी की है।

इसके अलावा तमिलनाडु सरकार के अनुरोध पर IIT मद्रास में प्रस्तावित अध्ययन को भी समर्थन देने की बात FSSAI ने कही है।

खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक को लेकर पहले भी हुई है जांच

FSSAI ने 2024 में खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी का पता लगाने और उसकी मात्रा का आकलन करने के लिए शोध परियोजना शुरू की थी। इसमें पैकेज्ड पानी, नमक और चीनी समेत अलग-अलग खाद्य नमूनों की जांच की गई थी।

हालांकि, किसी खाद्य नमूने में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी मिलना और उससे मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान का वैज्ञानिक रूप से निश्चित होना अलग-अलग बातें हैं। इसी अंतर को लेकर FSSAI ने अधिक शोध की जरूरत पर जोर दिया है।

FSSAI का लेबलिंग को लेकर एक और तर्क

FSSAI ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा कि अगर हर संभावित संदूषक, भारी धातु या माइक्रोबायोलॉजिकल पैरामीटर के लिए अलग-अलग चेतावनी अनिवार्य की जाती है, तो खाद्य उत्पादों के पैकेट पर कई तरह की चेतावनियां दिखाई दे सकती हैं। इससे लेबलिंग व्यवस्था जटिल हो सकती है और खाद्य कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी। 18 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया था। इसके बाद FSSAI ने मद्रास हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की।

क्या अभी चीनी के पैकेट पर माइक्रोप्लास्टिक चेतावनी अनिवार्य है?

इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। इसलिए इसे पूरे देश में लागू हो चुका नया खाद्य लेबलिंग नियम बताना सही नहीं होगा। आगे अदालत के फैसले और नियामक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि पैकेज्ड चीनी, नमक और बोतलबंद पानी पर माइक्रो/नैनोप्लास्टिक संबंधी चेतावनी किस रूप में लागू होगी।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?

माइक्रोप्लास्टिक को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं। उपभोक्ताओं को इस विषय पर सोशल मीडिया की अपुष्ट जानकारी के बजाय FSSAI और अन्य आधिकारिक संस्थाओं की जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल इस विवाद का अहम पहलू यह है कि माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी और उससे होने वाले वास्तविक मानव स्वास्थ्य प्रभावों के बीच संबंध को लेकर और शोध की जरूरत है।

FAQ: चीनी में माइक्रोप्लास्टिक को लेकर सवाल-जवाब

माइक्रोप्लास्टिक क्या है?
माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के बहुत छोटे कण होते हैं। इससे भी छोटे कणों को आम तौर पर नैनोप्लास्टिक कहा जाता है।

क्या चीनी में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है?
कुछ शोध और नमूना परीक्षणों में चीनी समेत खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आई है। इसकी मात्रा और स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर अध्ययन जारी हैं।

FSSAI ने क्या मांग की है?
FSSAI ने मद्रास हाईकोर्ट के माइक्रोप्लास्टिक चेतावनी संबंधी आदेश की समीक्षा की मांग की है।

क्या माइक्रोप्लास्टिक से स्वास्थ्य को नुकसान साबित हो चुका है?
माइक्रोप्लास्टिक के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध जारी है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को अभी पूरी तरह निर्णायक नहीं माना जा सकता।

क्या हर चीनी के पैकेट पर अभी चेतावनी जरूरी है?
इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। इसलिए इसे देशभर में लागू हो चुका अनिवार्य नियम मानना उचित नहीं है।

स्रोत: ChiniMandi की 7 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और उपलब्ध न्यायिक/नियामक जानकारी। ChiniMandi रिपोर्ट पढ़ें। खाद्य सुरक्षा संबंधी आधिकारिक जानकारी के लिए FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

संबंधित खबर: महाराष्ट्र FDA की खाद्य सुरक्षा कार्रवाई

News collage showing FSSAI logo, sugar, magnifying glass on sugar crystals; headline in Hindi about microplastics in sugar and court order.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading