नई दिल्ली/जालना: परिवार में जरूरत पड़ने पर रिश्तेदारों को नकद पैसे उधार देना आम बात है, लेकिन बड़ी रकम का लेन-देन आयकर कानून के दायरे में आ सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 269SS के तहत ₹20,000 या उससे अधिक के ऋण या जमा को सामान्यतः नकद में स्वीकार करने पर रोक है। यह नियम केवल रिश्तेदारों के बीच लेन-देन होने से अपने-आप समाप्त नहीं हो जाता।
क्या रिश्तेदारों को नकद उधार देना गैरकानूनी है?
धारा 269SS मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होती है जो ऋण या जमा की रकम स्वीकार करता है। ₹20,000 की सीमा एक ही लेन-देन, उसी व्यक्ति से पहले से बकाया ऋण/जमा और नई रकम को मिलाकर भी देखी जा सकती है। इसलिए रकम को छोटे हिस्सों में बाँट देने से नियम से बचने की गारंटी नहीं मिलती।
कानून में कुछ अपवाद भी हैं। संबंधित परिस्थितियों में बैंकिंग चैनलों से भुगतान करना—जैसे अकाउंट-पेयी चेक, बैंक ड्राफ्ट या निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम—अधिक सुरक्षित विकल्प है। किसी खास पारिवारिक परिस्थिति में अपवाद लागू होता है या नहीं, यह तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगा।
उल्लंघन पर क्या हो सकता है?
धारा 269SS के उल्लंघन पर आयकर अधिनियम की धारा 271D के तहत, लागू शर्तों के अधीन, स्वीकार की गई ऋण या जमा राशि के बराबर तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, हर मामले का परिणाम तथ्यों, उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून में दिए गए बचाव/अपवादों पर निर्भर करता है।
एडवोकेट महेश धन्नावत की राय
“रिश्तेदारी में भरोसे के आधार पर पैसा देना स्वाभाविक है, लेकिन बड़ी रकम का लेन-देन करते समय कानूनी औपचारिकताओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ₹20,000 या उससे अधिक के ऋण/जमा के मामले में धारा 269SS और संभावित अपवादों की जाँच करें तथा बैंकिंग माध्यम और लिखित रिकॉर्ड को प्राथमिकता दें। किसी विशेष मामले में कदम उठाने से पहले योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होगा।”
— एडवोकेट महेश धन्नावत, जालना
पाठकों के लिए जरूरी सलाह: यह सामान्य कानूनी जानकारी है, व्यक्तिगत कर सलाह नहीं। लेन-देन करने से पहले मौजूदा कानून और अपने मामले के तथ्यों की पुष्टि करें।
आधिकारिक जानकारी और मूल रिपोर्ट
आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर धारा 269SS का पूरा प्रावधान पढ़ें। इस विषय पर Law Trend की मूल रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है: Is Lending Cash to Relatives? Understanding Section 269SS of the Income Tax Act.
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