उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना तक और फिर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स मंच पर देश का नाम रोशन करने तक का गुलवीर सिंह का सफर प्रेरणा से भरा है। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका सिल्वर मेडल वर्षों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का परिणाम है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया ऐतिहासिक पदक
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में 28 जुलाई को भारतीय धावक और सेना में नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।
सेना में भर्ती का सपना बना सफलता की पहली सीढ़ी
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव के रहने वाले 27 वर्षीय गुलवीर सिंह ने दौड़ की शुरुआत किसी बड़े खेल करियर के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भर्ती होने के उद्देश्य से की थी। उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2018 में उन्हें भारतीय सेना की प्रतिष्ठित ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने का अवसर मिला।
सेना में रहते हुए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग और दौड़ दोनों को बराबर महत्व दिया। यही अनुशासन आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक ले गया।
एशियन गेम्स से लेकर कॉमनवेल्थ तक शानदार सफर
गुलवीर सिंह ने वर्ष 2022 के एशियन गेम्स में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद 2023 की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर स्पर्धा में भी कांस्य पदक अपने नाम किया।
वर्ष 2025 में उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर खुद को एशिया के शीर्ष धावकों में शामिल कर लिया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन गया है।
रिकॉर्डों से भरा है गुलवीर का करियर
गुलवीर सिंह के नाम 5,000 मीटर, 10,000 मीटर, हाफ मैराथन और एक मील दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं। वर्ष 2026 में उन्होंने हाफ मैराथन 59 मिनट 42 सेकंड में पूरी कर एक घंटे से कम समय में यह दूरी तय करने वाले पहले भारतीय एथलीट बनने का गौरव हासिल किया।
इसी वर्ष अमेरिका में आयोजित म्यूजिक सिटी कार्निवल में उन्होंने चार मिनट से कम समय में एक मील की दौड़ पूरी कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
गुलवीर सिंह की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और अनुशासन से बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। सेना में भर्ती का सपना लेकर दौड़ शुरू करने वाला एक युवा आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ा रहा है।
गुलवीर सिंह का सफर केवल पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत की मिसाल है। कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गया उनका सिल्वर मेडल देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह साबित करता है कि जुनून और अनुशासन के साथ असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
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