Encroachment or injustice? Serious questions raised on the action of the Municipal Corporation
*अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर विवाद:
जालना। शहर में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुधवार (12 फरवरी) को महानगरपालिका ने पानीबेस इलाके में एक निर्माण को गिराने की कार्रवाई की. हालांकि, इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
मामला: यह विवाद दरगाह हज़रत जानुल्लाह शाह बाबा के खादिम मोहम्मद जावेद मोहम्मद यूसुफ से जुड़ा है. उनका दावा है कि जिस भूमि को मनपा ने अतिक्रमण बताया है, वह सर्वे नंबर 237 , दरगाह की इनामी जमीन है और इसका उल्लेख महाराष्ट्र शासन के 1973 के गजट में दर्ज है.

*बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप
मोहम्मद जावेद ने आरोप लगाया कि मनपा ने बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ही निर्माण को ध्वस्त कर दिया. विरोध स्वरूप वे मलबे के बीच टीन शेड के नीचे बैठ गए, जिससे मनपा की टीम असमंजस में पड़ गई.
*”दस्तावेज होने के बावजूद मनपा सुनवाई को तैयार नहीं”
मोहम्मद जावेद का कहना है, “मेरे पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन मनपा उन्हें देखने तक को तैयार नहीं। यह जमीन महाराष्ट्र सरकार के गजट में इनामी भूमि के रूप में दर्ज है, फिर इसे अतिक्रमण कैसे माना जा सकता है?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण थी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा.
*शिकायत वापस लेने के दबाव का आरोप
मोहम्मद जावेद ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी को स्वच्छता निरीक्षक ने उनके निर्माण को तोड़ने का प्रयास किया था. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो हमला कर दिया. जिसमें वह लहूलुहान हो गए थे. इस घटना की शिकायत उन्होंने सदर बाजार पुलिस थाने में दर्ज करवाई थी. और मेडिकल भी करवाया गया था. मोहम्मद जावेद का कहना है कि उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था और बुधवार को की गई कार्रवाई इसी साजिश का हिस्सा थी.
*आयुक्त और पुलिस आमने-सामने, कार्रवाई अधर में
इस पूरे मामले में मनपा आयुक्त संतोष खांडेकर ने पुलिस को मोहम्मद जावेद के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट कहा कि बिना लिखित शिकायत के वे कोई कदम नहीं उठा सकते. इस पर मनपा अधिकारियों और पुलिस के बीच करीब 15 मिनट तक बहस हुई, लेकिन अंततः न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही मनपा की टीम अपना काम पूरा कर सकी.
अब सवाल उठता है कि यह कार्रवाई वास्तव में अतिक्रमण हटाने के लिए की गई थी या फिर इसके पीछे कोई और उद्देश्य था? इस विवाद का क्या समाधान निकलेगा, यह देखने वाली बात होगी.


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