Maratha Mahasangh protested against Ajit Pawar, expressed anger by showing black flags
जालना: अखिल भारतीय मराठा महासंघ के कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के जालना दौरे के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया. महासंघ ने आरोप लगाया कि बीड जिले में बढ़ती अपराध घटनाओं और सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के बावजूद, पवार ने पालकमंत्री पद खुद के पास रखते हुए हालात सामान्य होने पर इसे धनंजय मुंडे को सौंपने की रणनीति बनाई है. महासंघ का कहना है कि इस कदम से जनता में आक्रोश बढ़ रहा है.
इस विरोध प्रदर्शन में मराठा महासंघ के जिलाध्यक्ष अरविंद देशमुख, कोषाध्यक्ष अशोक पडूल, मंगेश मोरे समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. कार्यकर्ता सुबह से ही जालना के नया मोंढा रोड पर काले झंडे दिखाने के लिए तैयार थे, लेकिन पुलिस सतर्कता के चलते उन्हें रोकने की कोशिश की गई.हालांकि, कार्यकर्ताओं ने गनिमी कावा अपनाकर विभिन्न स्थानों पर काले झंडे लहराए और अपना विरोध जताया.

मराठा महासंघ के जिलाध्यक्ष अरविंद देशमुख ने कहा कि महासंघ किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं करता, बल्कि गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीड जिला अपराधों की चपेट में है और धनंजय मुंडे के नेतृत्व में स्थिति और खराब हो रही है. महासंघ ने मांग की है कि बीड की जनता को भयमुक्त वातावरण देने के लिए किसी अन्य नेता को पालकमंत्री बनाया जाए.
महासंघ ने अजित पवार पर पुणे में अपराध नियंत्रण में असफल रहने और वहां की कोयता गैंग, रेत माफिया, और जमीन हड़पने वाले गिरोहों पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया. महासंघ ने पूर्व कृषि मंत्री धनंजय मुंडे के कार्यकाल में वाल्मीक कराड द्वारा हार्वेस्टर खरीद घोटाले में 140 किसानों से 8-8 लाख रुपये लेने के मामले की गहन जांच की मांग की है.

महासंघ ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले का निपटारा नहीं होता, तब तक धनंजय मुंडे को मंत्री पद न दिया जाए. उन्होंने अजित पवार पर आरोप लगाया कि वे केवल औपचारिक दौरे कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं और मुंडे सहित अन्य नेताओं को बचाने का प्रयास कर रहे हैं.
मराठा महासंघ की मांग है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बीड जिले में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए.
