मुंबई, 18 अक्टूबर 2026। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण को लेकर Form 6 की मौजूदा भाषा पर सवाल उठे हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग से इसमें संशोधन का अनुरोध किया है, ताकि पहले से मतदाता रह चुके नागरिकों को फिर से आवेदन करते समय स्वयं को पहली बार पंजीकरण कराने वाला घोषित न करना पड़े।
Form 6 को लेकर विवाद क्यों?
Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए होता है। इसकी वर्तमान घोषणा में आवेदक के पहली बार नाम दर्ज कराने का उल्लेख है। जिन नागरिकों का नाम पहले सूची में था लेकिन पुनरीक्षण के दौरान हट गया, उनके लिए ऐसी घोषणा असहज स्थिति पैदा कर सकती है। मामला केवल शब्दों का नहीं, बल्कि आवेदन में दी जाने वाली जानकारी की सत्यता का भी है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित जानबूझकर गलत लिखित घोषणा दंडनीय हो सकती है। हालांकि हर त्रुटि अपने आप अपराध नहीं बन जाती; कानूनी प्रावधान में गलत जानकारी की जानकारी या विश्वास का प्रश्न महत्वपूर्ण है।
महाराष्ट्र के प्रस्ताव में क्या है?
राज्य ने फॉर्म से ‘नए मतदाता’ जैसी सीमित भाषा हटाने, पहले से पंजीकृत रहे व्यक्तियों के लिए अलग घोषणा उपलब्ध कराने और पुराना EPIC यानी मतदाता पहचान पत्र नंबर दर्ज करने की सुविधा देने का सुझाव रखा है। इससे नए और पूर्व पंजीकृत आवेदकों की स्थिति अलग-अलग दर्ज हो सकेगी।
मतदाताओं के लिए इसका क्या अर्थ है?
प्रस्ताव को निर्वाचन आयोग की मंजूरी मिलने तक इसे लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। जिन नागरिकों का नाम सूची में नहीं दिख रहा है, वे पहले आधिकारिक पोर्टल पर अपनी स्थिति जांचें और संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से सही प्रक्रिया की पुष्टि करें। गलत घोषणा करने के बजाय स्पष्ट मार्गदर्शन लेना जरूरी है।
मतदाता सूची में नाम की जांच और आवेदन संबंधी जानकारी निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है। राज्य स्तर की जानकारी के लिए महाराष्ट्र मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट देखी जा सकती है।
चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल
विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की सही सूची तैयार करना है। लेकिन पहले से पंजीकृत नागरिकों के लिए पुनः आवेदन की प्रक्रिया अस्पष्ट होने पर भ्रम और अनावश्यक परेशानी बढ़ सकती है। प्रस्तावित संशोधन इसी अंतर को स्पष्ट करने का प्रयास है। चुनाव आयोग का अंतिम निर्णय और आधिकारिक निर्देश ही आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट।
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