जालना, 25 अक्टूबर 2026. जिले की जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उपलब्ध जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार कक्षा छठी से आठवीं तक पढ़ाने वाले पदवीधर शिक्षकों के 169 पद खाली हैं. इसके अलावा 47 मुख्याध्यापक पद भी रिक्त बताए गए हैं. यानी इन दोनों श्रेणियों में कुल 216 पद खाली हैं. यह जानकारी 21 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सामने आई है.
1,071 स्वीकृत पद, 169 पदों पर शिक्षक नहीं
जिला परिषद के उच्च प्राथमिक विभाग में मराठी और उर्दू माध्यम के लिए पदवीधर शिक्षकों के कुल 1,071 पद मंजूर हैं. इनमें लगभग 902 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 169 पद खाली हैं. माध्यम के हिसाब से 147 पद मराठी और 22 पद उर्दू माध्यम में रिक्त बताए गए हैं. ये पद छठी से आठवीं कक्षा की पढ़ाई से जुड़े हैं, जहां विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता विशेष महत्व रखती है.
मुख्याध्यापकों के भी 47 पद रिक्त
रिपोर्ट के अनुसार जिले में मुख्याध्यापकों के 47 पद खाली हैं. मुख्याध्यापक की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं होती; स्कूल के शैक्षणिक नियोजन, शिक्षक समन्वय, अभिभावकों से संवाद और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर भी उसका असर पड़ता है. इन रिक्तियों को भरने के लिए विभागीय प्रक्रिया की स्थिति पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जरूरी है.
उर्दू माध्यम की स्थिति पर भी चिंता
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उर्दू माध्यम में पहली से पांचवीं कक्षा के लिए मंजूर 159 पदों में 132 शिक्षक कार्यरत और 27 पद रिक्त हैं. उर्दू माध्यम के पदवीधर शिक्षकों के 70 मंजूर पदों में से 22 खाली हैं. मुख्याध्यापकों के छह पद भी रिक्त बताए गए हैं. इससे ग्रामीण इलाकों के उर्दू माध्यम स्कूलों में अध्यापन और प्रबंधन की जरूरतों पर ध्यान देने की आवश्यकता सामने आती है.
एक तरफ पद खाली, दूसरी तरफ 165 शिक्षक अतिरिक्त
रिपोर्ट में एक प्रशासनिक विरोधाभास भी सामने आया है. पहली से पांचवीं कक्षा के मराठी माध्यम में 3,712 स्वीकृत पदों के मुकाबले 3,877 शिक्षक कार्यरत बताए गए हैं. इस आधार पर 165 शिक्षक अतिरिक्त दर्ज किए गए हैं. दूसरी ओर उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पदवीधर शिक्षकों की कमी है. हालांकि अतिरिक्त प्राथमिक शिक्षकों को उच्च प्राथमिक पदों पर सीधे समायोजित किया जा सकता है या नहीं, यह उनकी शैक्षणिक योग्यता, सेवा नियमों और विभागीय मंजूरी पर निर्भर करेगा.
ग्रामीण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर क्या असर?
छठी से आठवीं कक्षा में भाषा, गणित, विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की नियमित उपलब्धता जरूरी है. पद रिक्त रहने पर मौजूदा शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ सकता है. हालांकि किसी विशेष स्कूल में कौन सा विषय प्रभावित हुआ है, इसकी पुष्टि स्कूलवार रिकॉर्ड से ही होगी. जिले के सभी स्कूलों की स्थिति एक जैसी मानना उचित नहीं होगा.
शिक्षा विभाग के सामने अहम सवाल
इन आंकड़ों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पदोन्नति और रिक्त पद भरने की प्रक्रिया कब पूरी होगी. स्कूलवार रिक्तियों की सूची, पात्र शिक्षकों की पदोन्नति, आवश्यकतानुसार नियमानुसार समायोजन और दूरदराज के स्कूलों में अध्यापन व्यवस्था के बारे में स्पष्ट कार्ययोजना जरूरी है. अभिभावकों को अपने बच्चों के स्कूल में शिक्षक उपलब्धता की जानकारी स्कूल प्रबंधन समिति और संबंधित शिक्षा कार्यालय से मिल सकती है.
सूखे के बीच शिक्षा की चुनौती और बढ़ी
जालना में सूखे से प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी प्रशासन के सामने चुनौती है. जिला परिषद ने स्कूलों को शैक्षणिक आधार केंद्र की तरह काम करने और जोखिम वाले विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने की कार्ययोजना बनाई है. ऐसे समय शिक्षक और मुख्याध्यापक पदों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है. संबंधित रिपोर्ट पढ़ें: सूखे के बीच जालना जिला परिषद की शिक्षा कार्ययोजना.
स्रोत और आंकड़ों की स्थिति: यह रिपोर्ट पुढारी में 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार और उसमें दिए जून 2026 तक के विभागीय आंकड़ों पर आधारित है. अक्टूबर के अंत तक रिक्त पदों की अद्यतन संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
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