छत्रपति संभाजीनगर, 8 सितंबर: मराठवाड़ा के आठों जिलों में कुणबी, मराठा-कुणबी और कुणबी-मराठा प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। 10 सितंबर से पूरे मराठवाड़ा में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि प्राप्त आवेदनों में कोई भी मामला बिना फैसले के लंबित न रहे और जीरो पेंडेंसी का लक्ष्य हासिल किया जाए।
इस मुद्दे पर छत्रपति संभाजीनगर के स्मार्ट सिटी कार्यालय में करीब ढाई घंटे की मैराथन बैठक हुई। बैठक में मराठा आरक्षण मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष और जल संसाधन मंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील, मराठी भाषा एवं उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड मौजूद रहे। आठों जिलों के जिलाधिकारियों के साथ प्रांत अधिकारियों और जाति प्रमाणपत्र जांच अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
10 सितंबर से आठों जिलों में विशेष शिविर
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि 10 से 17 सितंबर तक जिलास्तर और मंडल स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों के जरिए उन नागरिकों तक जानकारी पहुंचाई जाएगी, जिनके पुराने रिकॉर्ड में कुणबी से जुड़ी प्रविष्टियां मिली हैं। लोगों को प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और वंशावली के सबूतों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
प्रमाणपत्र प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी पर जोर
डॉ. उदय सामंत ने अधिकारियों से कहा कि कुणबी, मराठा-कुणबी और कुणबी-मराठा जाति प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, आसान और तेज बनाया जाए। प्रशासन की ओर से रोजाना किए जा रहे काम की अपडेट जानकारी मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाई जाए। वहीं जिन आवेदनों को मंजूर नहीं किया जाता, उनके पीछे की वजह भी साफ तौर पर सार्वजनिक की जाए।
लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने और काम करने के तरीके में सुधार करने के निर्देश भी दिए गए। जालना, बीड और हिंगोली जिलों में लंबित मामलों को निपटाने के लिए हुई प्रगति की अधिकारियों ने सराहना की।
कुणबी रिकॉर्ड गांव और मंडल के हिसाब से ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर जोर
बैठक में पुराने कुणबी रिकॉर्ड को कंप्यूटर पर दर्ज करने और गांव तथा मंडल के हिसाब से सूचियां तैयार कर नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने के काम की भी समीक्षा हुई। डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील ने निर्देश दिया कि जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध रिकॉर्ड को इस तरह प्रकाशित किया जाए कि लोग उन्हें आसानी से देख और खोज सकें।
हर जिले में नियुक्त समन्वय अधिकारियों को इस काम की नियमित समीक्षा करने के लिए कहा गया है, ताकि रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया में लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।
मोडी और उर्दू के पुराने रिकॉर्ड का हिंदी नहीं, मराठी में अनुवाद
कई पुराने रिकॉर्ड मोडी, उर्दू और दूसरी भाषाओं में हैं। डॉ. सामंत ने निर्देश दिया कि इन पुराने दस्तावेजों का मराठी में अनुवाद कराया जाए और संबंधित रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों तथा जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध कराए जाएं।
राजस्व कर्मचारियों, तलाठियों और ग्रामसेवकों को भी आवेदकों को जरूरी दस्तावेज, वंशावली के प्रमाण और आवेदन करने की प्रक्रिया समझाने के निर्देश दिए गए हैं।
हैदराबाद गजट की SOP को लेकर अधिकारियों का भ्रम दूर करने के निर्देश
हैदराबाद गजट के आधार पर तैयार की गई मानक कार्यप्रणाली यानी SOP को लेकर निचले स्तर के अधिकारियों में किसी तरह का भ्रम न रहे, इसके लिए सभी जरूरी निर्देश साफ तौर पर पहुंचाने को कहा गया है। काम के दौरान कोई दिक्कत या कमी सामने आती है तो उसे अधिकारियों के सामने रखने और जरूरत के मुताबिक प्रक्रिया में सुधार करने के निर्देश भी दिए गए।
नामंजूर आवेदनों की वजह भी बतानी होगी
जाति प्रमाणपत्र की जांच तय समय में पूरी करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। आवेदकों को आवेदन की स्थिति, जरूरी दस्तावेज, वंशावली के सबूत और फैसले की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
अगर कोई आवेदन नामंजूर होता है तो उसमें अधूरे दस्तावेज या जरूरी वंशावली के प्रमाण उपलब्ध नहीं होने जैसे कारणों को साफ तौर पर दर्ज कर नागरिकों को बताया जाए। इससे लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि आवेदन में किस कमी को पूरा करना है।
अधिकारियों को रोजाना आंकड़े मीडिया तक पहुंचाने के निर्देश
बैठक में यह भी कहा गया कि आयुक्त, जिलाधिकारी, प्रांत अधिकारी और जाति जांच समिति के प्रमुखों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। सभी जिलों के संबंधित अधिकारी कुणबी रिकॉर्ड, मिले आवेदनों, बांटे गए प्रमाणपत्रों और लंबित मामलों की ताजा जानकारी नियमित रूप से मीडिया को दें।
इसके लिए प्रांत अधिकारियों को पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रशासन की ओर से किए जा रहे काम की जानकारी जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और लोगों के लिए आसान बनाना है।
बैठक में मौजूद अधिकारी: विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत, पुलिस महानिरीक्षक वीरेंद्र मिश्र, छत्रपति संभाजीनगर के जिलाधिकारी विनय गौड़ा, जालना की जिलाधिकारी अशिमा मित्तल, बीड के जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, छत्रपति संभाजीनगर के पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार, जालना के पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू और सहआयुक्त मंजुषा मिसकर सहित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहे। परभणी, नांदेड, लातूर और धाराशिव के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में जुड़े। आठों जिलों की जाति प्रमाणपत्र जांच समितियों के अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य सचिव और उपविभागीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।


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