जालना समाचार: जालना शहर में दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। जिस ‘स्वच्छता ऐप’ को शहर को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, वही अब प्रशासनिक लापरवाही और निष्क्रियता का प्रतीक बन गया है। इस ऐप की विफलता ने नागरिकों की समस्याएँ बढ़ा दी हैं और आवारा कुत्तों का आतंक जानलेवा बन चुका है।
अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत ने इस भयावह स्थिति को लेकर जालना के सांसद श्री कल्याण काले को एक विस्तृत निवेदन सौंपा है। उन्होंने कहा कि ‘स्वच्छता ऐप’ अब केवल नाम का रह गया है — नागरिक शिकायतें दर्ज करते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर जमा हैं, जिससे आवारा कुत्तों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है।
हाल ही में यशवंत नगर क्षेत्र में तीन वर्षीय परी दीपक गोस्वामी और गांधी नगर में आठ वर्षीय संध्या पाटोले की आवारा कुत्तों के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं ने पूरे शहर को शोक और आक्रोश में डुबो दिया है। नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कदम उठाए होते तो ये मासूम आज जीवित होतीं।
धन्नावत ने अपने निवेदन में यह भी कहा कि शहर में खुले और अस्वच्छ मांस दुकानों से कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई दुकानों से मांस के अवशेष खुले में फेंके जाते हैं, जिससे ये कुत्ते अब नागरिकों के लिए खतरा बन गए हैं। पहले भी नगर निगम ने कुछ दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
अधिवक्ता धन्नावत ने सांसद कल्याण काले से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चार प्रमुख माँगें रखीं:
- दोनों मृत बच्चियों के परिजनों को तत्काल आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
- आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगर निगम विशेष अभियान चलाए।
- अस्वच्छ मांस विक्रेताओं पर कठोर कार्रवाई की जाए।
- ‘स्वच्छता ऐप’ की विफलता की जांच कर लापरवाह अधिकारियों को दंडित किया जाए।
इन घटनाओं ने जालना की जनता में गहरी चिंता और गुस्सा पैदा कर दिया है। नागरिकों की एक ही मांग है — “अब प्रशासन जागे, ताकि किसी और माँ की गोद सूनी न हो।” इस मौके पर एडवोकेट आनंद झा, शाम सारस्वत, मयूर अग्रवाल और बालाजी मंत्री भी उपस्थित रहे।

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