NewsNation Online

News That Informs. Stories That Matter.

जालना जिले में 6.32 लाख पशुओं के लिए 6.40 लाख मेट्रिक टन चारे की जरूरत

जालना जिले में 6.32 लाख पशुओं के लिए 6.40 लाख मेट्रिक टन चारे की जरूरत
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

जालना. दुष्काल के हालात को देखते हुए जिले में पशुधन के लिए चारे की संभावित किल्लत से निपटने की तैयारी शुरू कर दी गई है। पशुसंवर्धन एवं दुग्ध व्यवसाय विभाग की जानकारी के अनुसार जुलाई 2027 तक जिले में करीब 6 लाख 40 हजार 980 मेट्रिक टन चारे की जरूरत पड़ेगी। विभाग ने इसके लिए कई स्तरों पर योजना तैयार की है।

21वीं पशुगणना के अनुसार जालना जिले में कुल 6 लाख 32 हजार 894 पशुधन है। इनमें 3 लाख 30 हजार 234 बड़े पशु, 49 हजार 32 छोटे पशु और 2 लाख 57 हजार 648 भेड़-बकरियां शामिल हैं। इन सभी पशुओं के लिए रोजाना 2,374 मेट्रिक टन चारा लगता है।

अभी 1.32 लाख मेट्रिक टन चारा उपलब्ध

विभाग के अनुसार फिलहाल जिले में 1 लाख 32 हजार 944 मेट्रिक टन चारा उपलब्ध है। जुलाई 2027 तक की जरूरत को देखते हुए करीब 5 लाख 8 हजार 36 मेट्रिक टन चारे की कमी रहने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखकर चारा उत्पादन बढ़ाने और भंडारण की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

पशुओं के लिए रोजाना करीब 29 लाख 25 हजार लीटर पानी की जरूरत है। इसे देखते हुए पशुसंवर्धन विभाग ने पानी की आपूर्ति का खाका तैयार किया है। यह प्रस्ताव संबंधित जलापूर्ति विभाग को भेजा जाएगा। बताया गया है कि जलापूर्ति विभाग टैंकरों के जरिए पशुओं के लिए पानी उपलब्ध कराएगा।

हाइड्रोपोनिक्स और अजोला को बढ़ावा

कम जमीन और कम पानी में पौष्टिक हरा चारा मिल सके, इसके लिए हाइड्रोपोनिक्स पद्धति से चारा उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस पद्धति में मिट्टी के बिना ट्रे में मक्का या किसी अन्य अनाज के अंकुरित दानों से सिर्फ 7 से 8 दिनों में हरा चारा तैयार हो जाता है। एक किलो अनाज से लगभग 6 से 8 किलो चारा मिल सकता है।

हाइड्रोपोनिक्स चारा संयंत्र के लिए 75 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। एक संयंत्र की कीमत 11,500 रुपये है, जिसमें 8,625 रुपये अनुदान और 2,875 रुपये लाभार्थी का हिस्सा है। जिले में 5,709 संयंत्रों का लक्ष्य रखा गया है और 50 लाख रुपये के अनुदान से यह योजना चलाने की तैयारी है।

Never miss a storyFollow News Nation Online on WhatsApp for breaking news from India and the world.
Follow on WhatsApp

उपलब्ध चारा जिले से बाहर न जाए, इसके लिए चारे के परिवहन पर रोक लगा दी गई है।

चारा बीज और मुरघास की व्यवस्था

चारा फसलों की खेती बढ़ाने के लिए 2026-27 में विभिन्न योजनाओं के जरिए चारा बीज बांटे जा रहे हैं। जिला वार्षिक योजना के तहत गालपेरा क्षेत्र और सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में चारा खेती को प्रोत्साहन दिया गया है। इस पहल में 9,788 लाभार्थियों को लाभ मिला है और 3,998.05 हेक्टेयर क्षेत्र में चारा खेती की योजना बनाई गई है।

जिले में अभी मुरघास (साइलेज) के 6 आपूर्तिकर्ता हैं, जिनके पास 2,425 मेट्रिक टन का भंडार है। इनमें बदनापुर तालुका में 3, जाफराबाद में 2 और भोकरदन में 1 आपूर्तिकर्ता हैं। मुरघास का भाव प्रति टन 6 हजार से 7 हजार रुपये बताया गया है।

मुख्य बातें

  • जिले में कुल पशुधन 6 लाख 32 हजार 894, रोजाना 2,374 मेट्रिक टन चारे की जरूरत।
  • जुलाई 2027 तक 6 लाख 40 हजार 980 मेट्रिक टन चारा चाहिए, उपलब्ध 1 लाख 32 हजार 944 मेट्रिक टन।
  • करीब 5 लाख 8 हजार 36 मेट्रिक टन चारे की कमी का अनुमान।
  • हाइड्रोपोनिक्स संयंत्र पर 75 प्रतिशत अनुदान, चारे के जिले से बाहर परिवहन पर रोक।
  • पशुओं के लिए रोजाना करीब 29.25 लाख लीटर पानी की जरूरत।

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

Leave a Reply