जालना, 2 अक्टूबर: कम बारिश और लंबे समय तक बारिश का खंड पड़ने से जालना जिले के कई हिस्सों में खेतों की तस्वीर बदल गई है। सूखती फसलों और किसानों की बढ़ती चिंता के बीच महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बदनापुर और भोकरदन तहसील के प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति देखी, किसानों से सीधे बात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
बावनकुले ने बदनापुर तहसील के वरुडी और भोकरदन तहसील के दगड़वाडी शिवार में फसलों का निरीक्षण किया। किसानों ने उन्हें बताया कि अपेक्षा से कम बारिश और लंबे अंतराल के कारण फसलें सूख रही हैं और लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संकट से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास करेगी।
खेतों में जाकर देखा नुकसान
दौरे के दौरान मंत्री ने किसानों के साथ खेतों में खड़ी और सूख चुकी फसलों को देखा। उन्होंने कहा कि जालना जिले में कम बारिश का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है और कई जगह किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार का प्रयास है कि नुकसान का सही आकलन हो और पात्र किसानों तक राहत की प्रक्रिया जल्द पहुंचे।
जालना की अर्थव्यवस्था में खेती की भूमिका बेहद अहम है। जालना जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के भौगोलिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कृषि उपयोग में है। यही वजह है कि बारिश में कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान परिवारों की आमदनी पर भी पड़ता है।
नुकसान का पंचनामा शुरू, राहत पर जोर
राजस्व मंत्री बावनकुले ने बताया कि प्रशासन को नुकसानग्रस्त फसलों का तत्काल पंचनामा करने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित विभागों ने यह काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों को हुए नुकसान का उचित आकलन किया जाए और नियमों के मुताबिक अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
प्राकृतिक आपदा के बाद राहत की सरकारी प्रक्रिया में पंचनामा महत्वपूर्ण चरण है। महाराष्ट्र राहत एवं पुनर्वास विभाग के अनुसार प्रभावित क्षेत्र का पंचनामा तहसील स्तर से आगे भेजा जाता है और मंजूरी के बाद पात्र लाभार्थियों के लिए DBT प्रक्रिया के जरिए सहायता दी जाती है। किसानों को संबंधित तहसील कार्यालय से अपने मामले की जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
जालना में बारिश पर खेती की बड़ी निर्भरता
जिले की खेती बारिश के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है। जालना जिला प्रशासन के मुताबिक यहां दक्षिण-पश्चिम मानसून से मुख्य बारिश मिलती है और जिले ने पहले भी कम वर्षा वाले दौर देखे हैं। ऐसे में लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ जाता है।
किसानों के लिए फसल बीमा और दूसरी कृषि योजनाओं की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। जालना जिला प्रशासन के कृषि विभाग सेवा पेज पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-किसान और एग्रीस्टैक फार्मर आईडी जैसी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है।
विश्रामगृह में नागरिकों की समस्याएं सुनीं
खेतों का दौरा करने के बाद चंद्रशेखर बावनकुले ने जालना के विश्रामगृह में नागरिकों से मुलाकात की। लोगों ने विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर उन्हें ज्ञापन सौंपे। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को मामलों पर जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
दौरे के दौरान विधायक बबनराव लोणीकर, विधायक संतोष दानवे, विधायक नारायण कुचे, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे, अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल, बदनापुर की उपविभागीय अधिकारी लता बागुल, भोकरदन के उपविभागीय अधिकारी एवं सहायक जिलाधिकारी कार्तिक पाणिग्रही और जिला अधीक्षक गहिनीनाथ कापसे सहित किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
किसानों की नजर अब राहत प्रक्रिया पर
फिलहाल प्रभावित किसानों के लिए सबसे अहम सवाल नुकसान के आकलन और राहत की प्रक्रिया का है। खेतों के पंचनामे पूरे होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई होगी। मंत्री के दौरे के बाद किसानों को उम्मीद है कि उनकी स्थिति का आकलन तेजी से होगा और पात्र परिवारों तक सहायता जल्द पहुंचेगी।
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