जालना में जैन समाज का आक्रोश: पुणे के जैन वसतिगृह व मंदिर भूमि बिक्री का विरोध — आचार्य श्री 108 गुप्तीनंदी महाराज करेंगे आमरण अनशन
जालना (प्रतिनिधि): पुणे में हिराचंद नेमचंद दिगंबर जैन बोर्डिंग (छात्रावास) और 1008 श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर की भूमि बिक्री के विरोध में सोमवार (27 अक्टूबर) को जालना शहर में सकल जैन समाज की ओर से विशाल विरोध रैली निकाली गई। इस रैली का उद्देश्य पुणे में चल रहे विवादित भूमि सौदे को रद्द कराना और कुंथलगिरी जैन तीर्थस्थल से हुई मूर्ति चोरी की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करना था।
सुबह सदर बाजार स्थित श्रेयांसनाथ दिगंबर जैन मंदिर से शुरू होकर यह दोपहिया मोर्चा जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। मोर्चे में सैकड़ों पुरुष, महिलाएं और युवा शामिल हुए। समाजबंधुओं ने हाथों में तख्तियां लेकर और जोरदार नारे लगाकर अपना विरोध प्रकट किया — “एचएनडी बचाओ, मंदिर बचाओ”, “यह हमारी विरासत है, इसे बचाना हमारा फर्ज है”, “कुंथलगिरी मूर्ति चोरी की जांच होनी चाहिए”, “बोर्डिंग हमारे हक की है, किसी की बपौती नहीं!”, “भगवान महावीर की जय, अहिंसा परमो धर्म की जय!”
जैन समाज ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने निवासी उपजिलाधिकारी मनीषा दांडगे को ज्ञापन सौंपा, जिसमें भूमि बिक्री को “धोखाधड़ीपूर्ण” बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि धर्मदाय आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत संस्था के उपनियमों के अनुसार विश्वस्तों को संस्था की भूमि बेचने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बावजूद, बिना किसी संरचनात्मक ऑडिट (Structural Audit) के भवन को “जर्जर” घोषित कर ₹311 करोड़ में भूमि गोखले बिल्डर्स को बेच दी गई।
समाज के अनुसार, यह निर्णय आस्था के साथ विश्वासघात के समान है। परिसर में लगभग 65 वर्ष पुराना 1008 श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर स्थित है, जिसे सौदे में नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा, मुंबई उच्च न्यायालय में मामला लंबित होने की जानकारी होते हुए भी 8 अक्टूबर 2025 को बिक्री प्रक्रिया पूरी की गई। बिल्डर ने इसके बाद ₹70 करोड़ का कर्ज उठाकर मंदिर सहित पूरी संपत्ति गिरवी रख दी।
“धोखाधड़ी और राजनैतिक दबाव का परिणाम” — समाज का आरोप
जैन समाज ने इस सौदे को पूरी तरह अवैध और मनमाना बताया। समाज के अनुसार, यह निर्णय बिना जांच, बिना पारदर्शिता और राजनीतिक दबाव में लिया गया। ज्ञापन में निम्न मांगें की गईं:
- धोखाधड़ीपूर्ण बिक्री अनुबंध को तत्काल रद्द किया जाए,
- मंदिर की धार्मिक पवित्रता और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखा जाए,
- जिम्मेदार विश्वस्तों और बिल्डरों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए,
- कुंथलगिरी से चोरी हुई चार मूर्तियों और दानपेटी की रकम की जांच शीघ्र पूरी की जाए।
महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी
इस विरोध मार्च में जालना की जैन महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। उन्होंने सफेद परिधान धारण कर शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ स्वर में अपनी धार्मिक भावना प्रकट की। उन्होंने कहा, “मंदिर और छात्रावास हमारी आस्था, संस्कृति और शिक्षा के प्रतीक हैं — इन्हें किसी भी कीमत पर बेचा नहीं जा सकता।”
आचार्य श्री 108 गुप्तीनंदी महाराज करेंगे आमरण अनशन
दिगंबर जैन समाज के आचार्य श्री 108 गुप्तीनंदी महाराज ने घोषणा की है कि यदि पुणे के जैन वसतिगृह और मंदिर की भूमि बिक्री रद्द नहीं की गई, तो वे 1 नवंबर से पुणे में आमरण अनशन पर बैठेंगे। समाज ने इसे जैन धर्म और परंपरा की रक्षा के लिए “अंतिम चेतावनी” करार दिया है।
निष्कर्ष
जालना में जैन समाज का यह विरोध अब एक राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। समाज का कहना है कि जब तक पुणे स्थित जैन वसतिगृह और मंदिर की भूमि बिक्री रद्द नहीं होती तथा कुंथलगिरी मूर्ति चोरी मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।



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