अंबड–घनसावंगी प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला: ₹24.90 करोड़ के गबन में 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज
- HIGHLIGHTS
- 🔴 अंबड–घनसावंगी में ₹24.90 करोड़ का बड़ा अनुदान घोटाला
- 🔴 240 गांवों में फर्जी लाभार्थियों के नाम पर गबन
- 🔴 22 तलाठी सहित कुल 28 आरोपी नामजद
- 🔴 13 आरोपी गिरफ्तार, 18 की अग्रिम जमानत खारिज
- 🔴 हाईकोर्ट के फैसले से जांच को मिली मजबूती
जालना | 12 जनवरी 2026
जालना जिले के अंबड और घनसावंगी तालुकों में प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि में हुए बड़े घोटाले के मामले में आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। लगभग ₹24 करोड़ 90 लाख के सरकारी अनुदान गबन प्रकरण में 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।
🔴 BREAKING NEWS: ₹24.90 करोड़ के अनुदान घोटाले में हाईकोर्ट ने 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राकृतिक आपदा के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए समय-समय पर चार सरकारी निर्णय (जीआर) जारी कर अनुदान घोषित किया था। आरोप है कि अंबड और घनसावंगी तालुकों में अनुदान लाभार्थियों की सूची अपलोड करने का कार्य कर रहे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में फर्जी लाभार्थियों के नाम सूची में दर्ज किए, जिनके नाम पर कृषि भूमि ही नहीं थी। इन्हीं फर्जी नामों पर स्वीकृत अनुदान की राशि आपसी मिलीभगत से वापस ले ली गई।
शिकायतें सामने आने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की। जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 240 गांवों में कुल ₹24,90,77,811 की सरकारी राशि का गबन किया गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अंबड पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण में 22 तलाठी, तहसील कार्यालय के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन विभाग के 5 कर्मचारी और जिलाधिकारी कार्यालय के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन कार्यालय का 1 कर्मचारी—इस प्रकार कुल 28 आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
मामला दर्ज होते ही कई आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस की नजर से बचने के लिए आरोपियों ने मोबाइल फोन का उपयोग भी बंद कर दिया था, जिससे उनकी गिरफ्तारी में कठिनाइयां आ रही थीं। इसके बावजूद आर्थिक अपराध शाखा ने गोपनीय सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों ने पहले जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर पीठ में अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 22 और 23 दिसंबर 2025 को सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था।
आज उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जिससे मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को और बल मिला है।
सरकार की ओर से इस प्रकरण में मुख्य सरकारी अभियोक्ता अमरजीतसिंह गिरासे के साथ सहायक सरकारी अभियोक्ता अफताब खान और आर. के. इंगोले ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।
यह पूरी कार्रवाई जालना के पुलिस अधीक्षक अजयकुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी और आर्थिक अपराध शाखा के प्रभारी उप पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ माने के मार्गदर्शन में की गई। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने मामले की गहन जांच और आरोपियों की धरपकड़ में अहम भूमिका निभाई है।
🔹 FAQ
❓ अंबड–घनसावंगी अनुदान घोटाला क्या है?
यह मामला प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों के लिए घोषित सरकारी अनुदान में फर्जी लाभार्थी दिखाकर करोड़ों रुपये के गबन से जुड़ा है।
❓ इस घोटाले में कितनी राशि का गबन हुआ?
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार कुल ₹24,90,77,811 की सरकारी राशि का गबन हुआ।
❓ कितने आरोपी इस मामले में शामिल हैं?
इस प्रकरण में कुल 28 आरोपी नामजद हैं, जिनमें तलाठी और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
❓ हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट ने 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
❓ कितने आरोपी अब तक गिरफ्तार हुए हैं?
आर्थिक अपराध शाखा ने अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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