न्यूज नेशन ऑनलाइन | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लेने के आरोप पर प्रेस संगठनों की प्रतिक्रिया।
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के आरोप ने प्रेस की स्वतंत्रता पर नया सवाल खड़ा किया है। प्रेस संगठनों ने दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रेस संगठनों ने प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को रोकने और हिरासत में लेने की घटनाओं पर आपत्ति जताई। रिपोर्टिंग के लिए घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार और आंदोलन में भाग लेने वाले व्यक्ति की भूमिका अलग होती है; किसी कार्रवाई की वैधता इसी तथ्य तथा लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगी।
क्या हैं प्रमुख सवाल?
ऐसी घटनाओं में पत्रकारों के पहचान पत्र, पुलिस द्वारा दर्ज किए गए कारण, हिरासत की अवधि और रिहाई का समय महत्वपूर्ण दस्तावेजी तथ्य हैं। हर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का पक्ष लेना आवश्यक है।
रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी शांतिपूर्ण और निहत्थे व्यक्तियों की हिरासत में कानूनी प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया। हालांकि अदालत के निर्देश को किसी विशिष्ट पत्रकार की हिरासत अवैध घोषित करने वाला निर्णय नहीं समझना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की मांगें और पुलिस का सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी पक्ष जनता तक पहुंचाने के लिए स्वतंत्र रिपोर्टिंग आवश्यक है। प्रेस संगठनों की आपत्तियों पर दिल्ली पुलिस का औपचारिक जवाब आने के बाद तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
संबंधित खबरें
जंतर-मंतर प्रदर्शन: रविवार की घटनाएं | सुप्रीम कोर्ट के निर्देश | एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
बाहरी स्रोत: मूल रिपोर्ट पढ़ें
नोट: आरोपों को संबंधित पक्षों के दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। नई आधिकारिक जानकारी मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी।
Discover more from NewsNation Online
Subscribe to get the latest posts sent to your email.













Leave a Reply