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दिल्ली तक दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन? यात्रियों को लुभाने के लिए रेलवे ने बनाया नया प्लान

नई दिल्ली/सोनीपत: देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को लेकर भारतीय रेलवे ने नया प्लान तैयार किया है। फिलहाल जींद-गोहाना-सोनीपत के बीच चल रही इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या कम रहने के बाद रेलवे इसकी टाइमिंग बदलने और इसे दिल्ली से बेहतर तरीके से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। दिल्ली तक नियमित सेवा शुरू होने की तारीख अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है।

रेलवे अधिकारियों के स्तर पर सुबह और शाम की नई समय-सारणी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जींद और गोहाना से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को सोनीपत के रास्ते बेहतर कनेक्टिविटी देना है। इसके साथ ही ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर तक बढ़ाने की संभावना पर भी काम चल रहा है।

फिलहाल जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर चल रही है ट्रेन

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई 2026 को जींद से रवाना किया गया था। आम यात्रियों के लिए इसका संचालन जींद-गोहाना-सोनीपत सेक्शन पर शुरू हुआ। यह करीब 89 किलोमीटर के रूट पर चल रही है। रेलवे इसे नई हाइड्रोजन तकनीक का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और पायलट प्रोजेक्ट मान रहा है।

कम यात्रियों के कारण रेलवे ने बदली रणनीति

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रेन की क्षमता करीब 2,600 यात्रियों की है, लेकिन मौजूदा रूट पर कई दिनों में केवल 40 से 60 यात्री ही सफर कर रहे हैं। कम यात्री संख्या की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि मौजूदा समय-सारणी दिल्ली जाने वाले दैनिक यात्रियों की जरूरत के मुताबिक नहीं है। कुछ स्टेशन और हाल्ट आबादी वाले क्षेत्रों से दूर होने के कारण भी यात्रियों को परेशानी होती है।

सुबह 5:45 बजे जींद से चलाने का प्रस्ताव

यात्रियों को आकर्षित करने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन को सुबह जल्दी चलाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार ट्रेन करीब सुबह 5:45 बजे जींद से रवाना होकर लगभग 7:30 बजे सोनीपत पहुंच सकती है। इसका मकसद सोनीपत से दिल्ली जाने वाली सुबह की ट्रेनों से यात्रियों को जोड़ना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोनीपत से दिल्ली के लिए सुबह करीब 7:35 बजे, 7:50 बजे और 8:10 बजे लोकल ट्रेनों के विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अलावा 9:28 बजे झेलम एक्सप्रेस का भी विकल्प बताया गया है।

शाम को सोनीपत से जींद की ओर लौटाने की योजना

प्रस्ताव में दिन के समय ट्रेन को जींद में खड़ा रखने के बजाय सोनीपत में रखने की बात भी सामने आई है। इसके बाद शाम करीब 5:30 बजे सोनीपत से गोहाना और जींद की ओर ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है। इससे दिल्ली से शाम के समय सोनीपत पहुंचने वाले यात्रियों को जींद और गोहाना की तरफ जाने के लिए बेहतर कनेक्शन मिल सकता है।

क्या सीधे दिल्ली तक जाएगी हाइड्रोजन ट्रेन?

दिल्ली तक विस्तार की संभावना पर रेलवे काम कर रहा है। आजादपुर तक ट्रेन चलाने के विकल्प पर परिचालन और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, दिल्ली तक नियमित यात्री सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित विस्तार के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

250 से 300 किलोमीटर तक की रेंज

अधिकारियों के मुताबिक, पूरी तरह हाइड्रोजन भरने के बाद ट्रेन करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है। फिलहाल इसकी हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग जींद में की जा सकती है। जींद से दिल्ली की दूरी करीब 130 किलोमीटर के आसपास है, इसलिए प्रस्तावित दिल्ली विस्तार के लिए ट्रेन की मौजूदा रेंज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिर भी नियमित सेवा के लिए रिफ्यूलिंग, ट्रैक क्षमता, संचालन और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की मंजूरी जरूरी होगी।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल होता है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिससे ट्रेन की मोटर चलती है। इस प्रक्रिया का प्रमुख उप-उत्पाद जलवाष्प होता है। PIB के अनुसार ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार हैं और कुल 2,400 किलोवाट की पावर क्षमता बताई गई है।

रेलवे के अनुसार ट्रेन में हाइड्रोजन लीक, गर्मी, आग और धुएं का पता लगाने के लिए अलग-अलग सुरक्षा प्रणालियां भी लगाई गई हैं।

रेलवे के लिए आगे की चुनौती क्या है?

रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नई तकनीक को व्यावहारिक और ज्यादा उपयोगी यात्री सेवा में बदलना है। अगर दिल्ली से मजबूत कनेक्टिविटी मिलती है और समय-सारणी दैनिक यात्रियों की जरूरत के मुताबिक होती है, तो ट्रेन की उपयोगिता बढ़ सकती है। सोनीपत से आगे पानीपत और सफीदों जैसे क्षेत्रों को जोड़कर बड़ा सर्किट बनाने का सुझाव भी सामने आया है, लेकिन यह अभी स्वीकृत रूट नहीं है।

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आधिकारिक और बाहरी स्रोत

नोट: दिल्ली तक हाइड्रोजन ट्रेन के विस्तार और नई टाइमिंग से जुड़ी जानकारी प्रस्तावित योजना/रिपोर्टों पर आधारित है। रेलवे की अंतिम मंजूरी और आधिकारिक समय-सारणी जारी होने के बाद ही इसे निश्चित सेवा माना जाएगा।

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Imran Siddiqui

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