बेंगलुरु: भारत रत्न से सम्मानित देश के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. सी.एन.आर. राव का नाम कर्नाटक में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान चर्चा में आ गया। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि मतदाता सूची में उनके नाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण उन्हें सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। नाम में सिर्फ एक अतिरिक्त ‘F’ जुड़ा होना इस पूरे मामले की वजह बताया गया। citeturn0search0turn0search1
हालांकि, 9 सितंबर 2026 को सामने आए आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद तस्वीर बदल गई। Greater Bengaluru Authority के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने कहा कि प्रो. सी.एन.आर. राव को नाम की गड़बड़ी को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि राव और उनके परिवार को कोई नोटिस नहीं दिया गया। citeturn0news2turn0search4
क्या था Extra ‘F’ का पूरा मामला?
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पुराने मतदाता रिकॉर्ड में नाम “Prof C N R Rao” दर्ज था, जबकि मौजूदा ड्राफ्ट रिकॉर्ड में इसे “Proff C N R Rao” लिखा गया। यानी अंग्रेजी शब्द Prof में एक अतिरिक्त F जुड़ गया था। इसी अंतर को SIR प्रक्रिया में “self-name mismatch” के रूप में बताया गया। citeturn0search0turn0search6
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इस आधार पर प्रो. राव को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम स्थित एक स्थान पर सुनवाई के लिए बुलाया गया था। उनके कार्यालय के प्रतिनिधि ने हालांकि कहा था कि उन्हें कोई भौतिक नोटिस नहीं मिला है और रिकॉर्ड में अतिरिक्त ‘F’ के अलावा कोई दूसरी समस्या नहीं थी। citeturn0search1
अधिकारियों ने क्या कहा?
बाद के आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया कि प्रो. सी.एन.आर. राव वर्तमान ड्राफ्ट मतदाता सूची में मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र के Part No. 59 के मतदाता हैं। SIR के दौरान अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की। अधिकारियों के मुताबिक उनकी प्रतिष्ठा और योगदान को देखते हुए उन्हें या उनके परिवार के किसी सदस्य को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। citeturn0search4
अधिकारी के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी ने रिकॉर्ड को अंतिम स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया और 8 सितंबर 2026 को संबंधित AERO ने अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल करने के रिकॉर्ड को मंजूरी दे दी। citeturn0search4
तो क्या CNR राव को वास्तव में SIR नोटिस मिला?
उपलब्ध ताजा आधिकारिक जानकारी के आधार पर जवाब है—नहीं। सुबह आई कई रिपोर्टों में नोटिस और सुनवाई की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में Greater Bengaluru Authority और कर्नाटक के निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रो. राव को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। इसलिए इस खबर को “नोटिस मिलने” के बजाय मतदाता सूची में नाम की स्पेलिंग से जुड़ा विवाद और उसके बाद आया आधिकारिक स्पष्टीकरण कहना ज्यादा सही होगा। citeturn0news2turn0search4
कौन हैं प्रो. सी.एन.आर. राव?
प्रो. चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव (C. N. R. Rao) भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में शामिल हैं। उनका जन्म 1934 में बेंगलुरु में हुआ था। वे खास तौर पर सॉलिड-स्टेट और स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री, मैटेरियल साइंस और नैनोमैटेरियल्स में अपने शोध के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में Solid State and Structural Chemistry Unit की स्थापना की और 1984 से 1994 तक IISc के निदेशक रहे। citeturn0search1
प्रो. राव को वर्ष 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वे यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले भारत के तीसरे वैज्ञानिक हैं। उन्हें पद्म विभूषण, पद्म श्री और कर्नाटक रत्न सहित कई बड़े सम्मान भी मिल चुके हैं। citeturn0search0turn0search6
SIR में “Self-Name Mismatch” का क्या मतलब है?
SIR के दौरान पुराने और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। जब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर भरी गई जानकारी और वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज जानकारी आपस में मेल नहीं खाती, तो ऐसी स्थिति को self-name mismatch जैसी श्रेणी में रखा जा सकता है। CNR राव के मामले में शुरुआती रिपोर्टों में यही अंतर अतिरिक्त ‘F’ को लेकर बताया गया था। citeturn0search0
मामले से क्या साफ हुआ?
- शुरुआती रिपोर्टों में CNR राव के नाम में अतिरिक्त ‘F’ के कारण SIR नोटिस की बात कही गई।
- उनके कार्यालय ने बताया कि उन्हें कोई भौतिक नोटिस नहीं मिला था।
- बाद में कर्नाटक के निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राव को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया।
- अधिकारियों ने उनके रिकॉर्ड को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
- इसलिए खबर का सबसे महत्वपूर्ण अपडेट आधिकारिक स्पष्टीकरण है।
स्रोत और उपयोगी लिंक
इस रिपोर्ट के लिए 9 सितंबर 2026 को प्रकाशित India Today, NDTV और Times of India की रिपोर्टों तथा कर्नाटक निर्वाचन अधिकारियों के स्पष्टीकरण को आधार बनाया गया है। आधिकारिक SIR जानकारी के लिए मतदाता निर्वाचन सेवाओं और निर्वाचन आयोग के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर का शीर्षक और शुरुआती विवरण दिन में सामने आई रिपोर्टों के आधार पर था, लेकिन बाद में अधिकारियों का स्पष्टीकरण सामने आया। NewsNationOnline ने ताजा आधिकारिक जानकारी को ध्यान में रखते हुए खबर को अपडेट किया है।

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