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२९ अक्टूबर का इतिहास: तुर्किये गणराज्य, शेयर बाजार और इंटरनेट

Photograph of the original UCLA IMP log recording the October 29, 1969 first ARPANET message
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

२९ अक्टूबर का इतिहास दुनिया की पांच बड़ी घटनाओं की याद दिलाता है। इसी दिन १९२३ में तुर्किये को औपचारिक रूप से गणराज्य घोषित किया गया। १९२९ में अमेरिकी शेयर बाजार की भारी गिरावट ने आर्थिक संकट को और गहरा किया। १९५६ में स्वेज संकट के दौरान मिस्र पर सैन्य हमला शुरू हुआ। १९६९ में दो दूरस्थ कंप्यूटरों के बीच एक ऐसा संदेश पहुंचा जिसने आगे चलकर इंटरनेट के विकास की राह खोली। फिर १९९८ में अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन ७७ वर्ष की उम्र में दोबारा अंतरिक्ष पहुंचे।

१९२३: तुर्किये में गणराज्य की घोषणा

२९ अक्टूबर १९२३ को तुर्किये की ग्रैंड नेशनल असेंबली ने देश को गणराज्य घोषित किया। मुस्तफा कमाल पाशा, जिन्हें बाद में अतातुर्क के नाम से जाना गया, पहले राष्ट्रपति चुने गए। इस निर्णय से पहले उस्मानी साम्राज्य का राजनीतिक ढांचा लंबे युद्ध और सत्ता परिवर्तन से गुजर चुका था। अंकारा में राष्ट्रीय सभा की शुरुआत १९२० में हुई थी और नवंबर १९२२ में सुल्तानशाही समाप्त की जा चुकी थी। अक्टूबर १९२३ में अंकारा को राजधानी बनाने का फैसला भी हो चुका था।

नई व्यवस्था के समर्थकों के लिए इसका अर्थ था कि शासन की वैधता वंशानुगत राजसत्ता के बजाय राष्ट्र की संप्रभुता से आएगी। अगले दिन इस्मेत इनोनू के नेतृत्व में पहली सरकार बनी।

हालांकि बदलाव के सभी पहलुओं पर एक जैसी सहमति नहीं थी। सत्ता के केंद्रीकरण, मजहबी संस्थाओं की भूमिका, अलग-अलग समुदायों के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को लेकर बहसें चलती रहीं। तुर्किये के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक इतिहास में २९ अक्टूबर की घोषणा और राष्ट्रपति के चुनाव का उल्लेख मिलता है।

१९२९: ब्लैक ट्यूसडे ने हिला दिया अमेरिकी शेयर बाजार

२९ अक्टूबर १९२९ को न्यूयॉर्क के शेयर बाजार में इतनी बड़ी बिकवाली हुई कि यह तारीख ब्लैक ट्यूसडे के नाम से मशहूर हो गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ऐतिहासिक अध्ययन के अनुसार, उस दिन डाउ जोन्स सूचकांक करीब बारह प्रतिशत गिरा। एक दिन पहले ब्लैक मंडे पर भी लगभग तेरह प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी।

बीसवीं सदी के तीसरे दशक में अमेरिका में शेयरों में निवेश बढ़ रहा था। कई लोग उधार लेकर भी शेयर खरीद रहे थे। बाजार चढ़ने पर यह तरीका आकर्षक लगता था, लेकिन कीमतें गिरते ही कर्ज चुकाने और शेयर बेचने का दबाव बढ़ गया। तेजी से फैलते डर ने हालात को और खराब किया।

१९२९ का शेयर बाजार संकट और उसके बाद आई महामंदी एक ही घटना नहीं थे। महामंदी के पीछे बैंकों की विफलता, मुद्रा और ऋण की कमी, मांग में गिरावट तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार की परेशानियां भी थीं। इसलिए किसी एक दिन की गिरावट को पूरी आर्थिक तबाही का अकेला कारण बताना गलत होगा। इस विषय की पृष्ठभूमि समझने के लिए हमारा २४ अक्टूबर का इतिहास भी पढ़ा जा सकता है, जिसमें ब्लैक थर्सडे का जिक्र है।

१९५६: स्वेज संकट में मिस्र पर सैन्य कार्रवाई

२९ अक्टूबर १९५६ को इजराइली सेना ने मिस्र के सिनाई क्षेत्र की ओर सैन्य अभियान शुरू किया। इससे स्वेज संकट खुली लड़ाई में बदल गया। इसकी पृष्ठभूमि में मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर का स्वेज नहर कंपनी का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला था। ब्रिटेन और फ्रांस के लिए नहर का आर्थिक और रणनीतिक महत्व बहुत अधिक था। इस फैसले से उनके हितों को चुनौती मिली।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रकाशित दस्तावेज बताते हैं कि ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल के प्रतिनिधियों के बीच गुप्त योजना बनी थी। इसके अनुसार पहले सिनाई में हमला होना था और फिर ब्रिटेन तथा फ्रांस सैन्य हस्तक्षेप का रास्ता अपनाने वाले थे। मिस्र ने इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ कार्रवाई माना। दूसरी ओर हमले में शामिल देशों ने अपने-अपने सुरक्षा और रणनीतिक तर्क पेश किए।

अमेरिका और सोवियत संघ समेत अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अंततः सैन्य कार्रवाई रोकने की दिशा में कदम उठे। स्वेज संकट ने दिखाया कि सैन्य ताकत होने के बावजूद कोई देश विश्व राजनीति की प्रतिक्रिया से अलग नहीं रह सकता।

१९६९: इंटरनेट की कहानी में पहला ऐतिहासिक संदेश

२९ अक्टूबर १९६९ की रात अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस में छात्र प्रोग्रामर चार्ली क्लाइन ने एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर संदेश भेजने की कोशिश की। संदेश स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर तक पहुंचना था, जहां बिल डुवाल मौजूद थे। योजना एक कंप्यूटर में दूर से प्रवेश करने के लिए पूरा शब्द लिखने की थी, लेकिन शुरुआती दो अक्षर पहुंचने के बाद सामने वाला कंप्यूटर बंद पड़ गया।

बाद में तकनीकी खराबी दूर की गई और पूरा संदेश भेजने का प्रयोग सफल हुआ। इसकी तकनीक में सूचनाओं को छोटे हिस्सों में भेजने का विचार महत्वपूर्ण था।

यह कहना ठीक नहीं होगा कि आधुनिक इंटरनेट उसी रात पूरी तरह बन गया था। इंटरनेट के आज के स्वरूप तक पहुंचने में अनेक वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों, कंपनियों और कई दशकों के तकनीकी विकास का योगदान रहा। फिर भी उस रात का प्रयोग बताता है कि अलग-अलग स्थानों के कंप्यूटरों के बीच संपर्क कैसे संभव होने लगा। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने उस समय के मूल अभिलेख को संरक्षित रखा है। तकनीकी इतिहास में रुचि हो तो २३ अक्टूबर का इतिहास भी पढ़ सकते हैं।

१९९८: जॉन ग्लेन ने ७७ वर्ष की उम्र में फिर भरी अंतरिक्ष उड़ान

२९ अक्टूबर १९९८ को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डिस्कवरी अंतरिक्ष यान एसटीएस-९५ मिशन पर रवाना हुआ। इसके दल में जॉन ग्लेन भी शामिल थे। वे फरवरी १९६२ में पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बने थे। लगभग सैंतीस साल बाद दोबारा अंतरिक्ष यात्रा करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि थी। उस समय ७७ वर्ष की उम्र में वे अंतरिक्ष जाने वाले सबसे अधिक आयु के व्यक्ति बने।

यह उड़ान केवल पुरानी उपलब्धि को याद करने के लिए नहीं थी। नासा ने भारहीनता के शरीर पर प्रभाव से जुड़े कई प्रयोग किए। इनमें संतुलन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, हड्डियों और मांसपेशियों, नींद तथा चयापचय से संबंधित अध्ययन शामिल थे। वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि अंतरिक्ष में होने वाले कुछ शारीरिक बदलावों और बढ़ती उम्र के प्रभावों में क्या समानताएं हैं।

नौ दिन से अधिक चले मिशन में सूर्य के अध्ययन और अंतरिक्ष उपकरणों से जुड़े प्रयोग भी किए गए। नासा के अनुसार यान ७ नवंबर १९९८ को पृथ्वी पर लौटा। ग्लेन की यात्रा ने लोगों को प्रेरित किया, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह समझना भी जरूरी है कि किसी एक यात्री पर किए गए प्रयोग से उम्र बढ़ने के सभी सवालों का उत्तर नहीं मिल जाता। अन्य अंतरिक्ष उपलब्धियों के लिए १५ अक्टूबर का इतिहास पढ़ें।

इन घटनाओं से आज क्या सीख मिलती है?

२९ अक्टूबर की घटनाएं बताती हैं कि इतिहास केवल जीत और उपलब्धियों की सूची नहीं है। गणराज्य का निर्माण राजनीतिक बदलावों के साथ कठिन सवाल भी लाता है। बाजार की तेज बढ़त जोखिम छिपा सकती है। अंतरराष्ट्रीय तनाव युद्ध में बदल सकता है। तकनीकी प्रयोग असफल होकर भी नई राह खोल सकते हैं और वैज्ञानिक अनुसंधान की उपयोगिता केवल रोमांच में नहीं, प्रमाण जुटाने में होती है।

किसी भी ऐतिहासिक तारीख को समझते समय उस समय के दस्तावेज, घटनाओं की पृष्ठभूमि और उनके लंबे असर देखना जरूरी है। यही तरीका इतिहास को रोचक होने के साथ विश्वसनीय भी बनाता है।

आधिकारिक स्रोत


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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