मुंबई, 30 अक्टूबर — ग्रामीण इलाकों के नागरिकों को घर के पास गुणवत्तापूर्ण, समग्र और निरंतर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देने के लिए महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कामकाज के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) की विज्ञप्ति के अनुसार, उपकेंद्र स्तर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए नियमित ओपीडी, गांव भेंट, घर भेंट, टेलीमेडिसिन, विभिन्न बीमारियों की जांच और आवश्यक प्राथमिक उपचार देना तय किया गया है।

केंद्र सरकार की समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की अवधारणा के अनुसार स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला गया है। इन केंद्रों से केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रोकथाम, बीमारियों की जल्द पहचान, स्वास्थ्य संवर्धन और जरूरत के अनुसार रेफरल सेवा देने पर जोर दिया गया है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर गाइडलाइन: तय समय-सारणी
सोमवार से शुक्रवार:
- सुबह 8.30 से दोपहर 12.30: आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ओपीडी — मरीजों की जांच, आवश्यक दवाएं और रक्तचाप सहित अन्य प्राथमिक जांचें
- दोपहर 2 से 4: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और चिकित्सा अधिकारी की योजना के अनुसार गांव भेंट और सामुदायिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं
- शाम 4 से 5: घर भेंट
- शाम 5 से 5.30: दिनभर के कामकाज की प्रविष्टि और संबंधित पोर्टल पर जानकारी अपडेट
शनिवार: सुबह 8.30 से दोपहर 12.30 तक ओपीडी के साथ उपकेंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर बैठकें, ई-संजीवनी और टेलीमेडिसिन सेवाओं का नियोजन किया जाएगा।
हर दिन कम से कम एक गांव का दौरा
ग्रामीण नागरिकों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को रोजाना कम से कम एक गांव का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं। दोपहर 2 से 4 बजे तक आंगनवाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्कूल या ग्राम पंचायत कार्यालय की उपलब्ध जगह में ओपीडी लगाई जाएगी। गांव भेंट के दिन तय किए जाएंगे और उनमें बदलाव न हो, इसका ध्यान रखने को कहा गया है। स्थानीय आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिकों को इन सेवाओं की पहले से जानकारी दी जाएगी।
गांव की गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, परिवार कल्याण शल्यक्रिया करा चुकी महिलाओं, छोटे बच्चों तथा संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों के मरीजों को घर भेंट के जरिए स्वास्थ्य सेवा और फॉलो-अप दिया जाएगा।
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14 तरह की जांच, दवाएं और टेलीमेडिसिन
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आवश्यक प्रयोगशाला जांचों के साथ जरूरी दवाओं का स्टॉक रखने के निर्देश हैं। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार 14 प्रकार की प्रयोगशाला जांचों पर जोर दिया गया है। ई-संजीवनी और टेलीमेडिसिन के नियमित उपयोग से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी। केंद्र में आवश्यक सामग्री, उपकरण और दवाएं उपलब्ध रखना अनिवार्य किया गया है।
क्षयरोग (टीबी), कुष्ठरोग, सिकलसेल, पैलिएटिव (उपशामक) देखभाल की जरूरत वाले मरीजों, उच्च जोखिम वाली गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं और अन्य संवेदनशील समूहों की जांच व फॉलो-अप पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय कीटजन्य रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सर्वेक्षण और गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच भी की जाएगी।
कामकाज की नियमित निगरानी
कामकाज के मूल्यांकन के लिए दैनिक, साप्ताहिक और मासिक निगरानी व्यवस्था तय की गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी रोजाना, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी साप्ताहिक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी मासिक स्तर पर समीक्षा करेंगे। दैनिक व साप्ताहिक ओपीडी संख्या, टेलीमेडिसिन परामर्श, बीमारीवार जांच, रेफर किए गए मरीज, घर भेंट और योग सत्रों की संख्या जैसे संकेतकों के आधार पर प्रदर्शन परखा जाएगा। प्रभावी अमल के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जो हर तीन महीने में समीक्षा करके दिशानिर्देशों में जरूरी सुधार सुझाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर की प्रतिक्रिया
“आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की डे-केयर ओपीडी सेवा से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब, जरूरतमंद और आम नागरिकों को घर के पास ही स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। इलाज के लिए दूर जाने की जरूरत कम होगी, समय बचेगा और निःशुल्क सेवा उपलब्ध होगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए गांव-गांव में स्वास्थ्य सेवा का नया अध्याय शुरू हो रहा है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।”
— प्रकाश आबिटकर, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ओपीडी का समय क्या है?
नई गाइडलाइन के अनुसार सोमवार से शनिवार सुबह 8.30 से दोपहर 12.30 तक ओपीडी चलेगी।
गांव में स्वास्थ्य सेवा कब और कहां मिलेगी?
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रोजाना दोपहर 2 से 4 बजे कम से कम एक गांव में आंगनवाड़ी, प्राथमिक स्कूल या ग्राम पंचायत कार्यालय में ओपीडी लगाएंगे।
कितनी तरह की लैब जांच होगी?
केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार 14 प्रकार की प्रयोगशाला जांचों पर जोर दिया गया है।
राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी के लिए maharashtra.gov.in देखें। स्वास्थ्य से जुड़ी और खबरें पढ़ें: हेल्थ एंड फिटनेस
स्रोत: सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR), महाराष्ट्र | प्रस्तुति: इमरान सिद्दीकी, जालना
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