“जीवन में सच्चा सुख रिश्तों, हास्य और संवाद में है” – डॉ. नंदू मुलमुले
मानस फाउंडेशन, जालना के चौथे वर्धापन दिवस पर ‘शोध सुख का’ विषय पर एक प्रेरक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
“पैसा, प्रसिद्धि या उपलब्धियाँ जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकतीं। असली संतोष और सुख प्रेमपूर्ण रिश्तों, सकारात्मक संवाद और हास्यपूर्ण दृष्टिकोण में छिपा है।”
– डॉ. नंदू मुलमुले
यह आयोजन मानस हॉस्पिटल, नाव्हा चौफुली परिसर में शनिवार को संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत दुर्वा सन्यासी व दिनेश सन्यासी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गायन ‘गाणे मनातले’ से हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अप्पर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी ने की। मंच पर डॉ. प्रकाश आंबेकर, उद्योगपति सुनील रायठठ्ठा और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
डॉ. मुलमुले ने वर्तमान समय की बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे विशेषकर विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कोटा (राजस्थान) का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ हर 15 दिन में एक छात्र आत्महत्या कर रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की क्षमताओं को समझें, उनकी रुचियों का सम्मान करें और सबसे महत्वपूर्ण – उनके साथ संवाद बनाए रखें। केवल लक्ष्य प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं, जीवन की यात्रा में हास्य और आनंद भी जरूरी हैं।
कार्यक्रम के समापन पर आयुष नोपानी ने मानस फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन भी अब किशोरों और युवाओं के लिए संयुक्त कार्यशालाओं में फाउंडेशन का सहयोग करेगा।
इस अवसर पर डॉ. प्रकाश आंबेकर ने फाउंडेशन की 4 वर्षों की गतिविधियों की जानकारी दी और नागरिकों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम संचालन: डॉ. सुहास सदावर्ते
अतिथि परिचय: डॉ. सुजाता देवरे
आभार प्रदर्शन: कालींदा उढाण
कार्यक्रम की सफलता में डॉ. शीतल आंबेकर, डॉ. यशवंत सोनुने, सतीश खरटमल, विनोद जैतमहाल, डॉ. वासुदेव उगले, डॉ. प्रणिता राठोड़, अभय वाकडे समेत कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस आयोजन में शहर के चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, व्यापार, साहित्य एवं प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़ी जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित थीं।


