NewsNation Online

News That Informs. Stories That Matter.

“काव्यसंगोष्ठी: साहित्यिक भावनाओं का अनुपम संगम”

कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

“Poetry symposium: A unique confluence of literary emotions”

जालना: जिले की सांस्कृतिक विरासत में एक और अध्याय जोड़ते हुए 12 जनवरी, रविवार की शाम को “काव्यसंगोष्ठी” नामक एक अद्भुत और सार्थक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री श्रीमती रेखा बैजल और हिंदी के प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं अनुवादक शिवकुमार बैजल की संकल्पना पर आधारित था। इस अनूठे साहित्यिक कार्यक्रम का संयोजन  पंडितराव तडेगावकर के सहयोग से किया गया.

नए साल की शुरुआत को विशेष बनाते हुए, बैजल दंपति ने “चला…भेटूया…” के विचार को आधार बनाकर अपने कवि मित्रों को आमंत्रित किया। सभी कवि अपनी भावपूर्ण रचनाओं और अनूठे विचारों के साथ इस काव्य मंच का हिस्सा बने, जिससे यह शाम अविस्मरणीय बन गई।

*कार्यक्रम की मुख्य झलकियां:

कार्यक्रम की शुरुआत में “शब्दगंध साहित्य सम्मेलन” की प्रस्तावित अध्यक्षा डॉ. संजीवनी तडेगावकर का परभणी लेखिका सम्मेलन की अध्यक्षा  रेखा बैजल द्वारा सम्मान किया गया। साथ ही, “सुधा मूर्ति” चरित्र ग्रंथ की लेखिका डॉ. ज्योति धर्माधिकारी को प्रा. गणेश अग्निहोत्री द्वारा सम्मानित किया गया.

इस काव्य संध्या में उर्दू मुशायरे की तर्ज पर कवियों ने क्रमवार अपनी कविताओं का पाठ किया। पहली बार अपनी रचनाओं को प्रस्तुत करने वाले प्राचार्य डॉ. गणेश अग्निहोत्री और महाराष्ट्र के प्रसिद्ध चित्रकार  श्रीधर अंभोरे ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया.

*प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएं:

कवी गणेश खरात, डॉ. बी.जी. श्रीरामे, बसवराज कोरे, सुनील लोणकर “दर्द,” और सुहास पोतदार ने अपनी अनूठी रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया.

लक्ष्मीकांत दाभाडकर ने हास्य कविताओं के माध्यम से कार्यक्रम में जीवंतता ला दी.

Never miss a storyFollow News Nation Online on WhatsApp for breaking news from India and the world.
Follow on WhatsApp

डॉ. सुहास सदावर्ते की कविता “बातमी अन पाऊस” ने गहरी संवेदनशीलता का संचार किया.

गजलकार राज रणधीर ने समुद्रमंथन पर आधारित अपनी विशेष गजल प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया.

डॉ. प्रभाकर शेलके ने अपनी साजणी को समर्पित गीतात्मक कविता प्रस्तुत की।


*भावनाओं का बहुआयामी प्रदर्शन:

कवयित्री  रेखा गतखने ने अपनी रचना “रितं-रितं हे जगणं” से गहरी भावनाओं को व्यक्त किया, जबकि  रेखा बैजल की कविता “चिखलाचं चिलखत आयुष्याच्या घरावर चढतं” ने समाज के विरोधाभासों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा.

आयोजक शिवकुमार बैजल ने अपनी प्रेरक हिंदी कविता “बहन बेटियों सम्हल के निकलो, बस्ती में शैतान बहुत हैं” के माध्यम से समाज को एक आवश्यक संदेश दिया.

कार्यक्रम का समापन  रेखा बैजल द्वारा गाए गए सुमधुर “पसायदान” से हुआ। इस काव्य संध्या ने अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रस्तुतियों और सुव्यवस्थित आयोजन के कारण श्रोताओं और कवियों के मन पर एक गहरी छाप छोड़ी.


Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.