नई श्रम संहिताएँ लागू: कामगार सुरक्षा और औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम — एडवोकेट महेश धन्नावत
जालना — केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 से देशभर में चार नई श्रम संहिताओं को लागू करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई है। वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता 2020 मिलकर देश के कुल 29 पुराने श्रम कानूनों का स्थान लेंगी।
स्वतंत्रता-पूर्व काल में बने कई नियम आज की आवश्यकता के अनुरूप नहीं थे, इसलिए इन संहिताओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था और बदलते श्रम ढांचे के अनुरूप बनाया गया है।
नोटरी एसोसिएशन, जालना के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने इन नई संहिताओं को “कामगारों के हितों को सुरक्षित करते हुए उद्योगों को भी मजबूती देने वाला सुधार” बताया। उन्होंने कहा कि जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में एकीकृत श्रम संहिता सफलतापूर्वक काम कर रही है, और भारत का यह कदम आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा देगा।
नई श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधान
- सार्वत्रिक न्यूनतम वेतन: सभी क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का अधिकार सुनिश्चित।
- समय पर वेतन: मजदूरों को निर्धारित समय पर वेतन देना कानूनी रूप से अनिवार्य।
- नियुक्ति पत्र अनिवार्य: हर कामगार को नौकरी देते समय नियुक्ति पत्र देना जरूरी।
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: असंगठित श्रमिक, गिग व प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (जैसे जोमैटो, उबर आदि) को भी पहली बार PF और ESIC का लाभ।
- ग्रेच्युइटी में राहत: अब निश्चित अवधि के कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: 40 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारियों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य।
- महिला सुरक्षा व समानता: महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति; सुरक्षा सुनिश्चित करना संस्थान की जिम्मेदारी। वेतन में लिंग भेद पूर्णतः प्रतिबंधित।
- सरल प्रणाली: कई लाइसेंसों के स्थान पर अब सिर्फ एक पंजीकरण, एक लाइसेंस और एक रिटर्न — जिससे समय, खर्च और परेशानी कम होगी।
- ‘इंस्पेक्टर राज’ खत्म: अब निरीक्षकों की भूमिका ‘मार्गदर्शक और सहायक’ की होगी।
- तेज़ विवाद निवारण: औद्योगिक विवादों के समाधान हेतु त्वरित न्यायाधिकरण स्थापित किए जाएंगे।
एड. धन्नावत ने कहा कि इन संहिताओं से मजदूरों का जीवन स्तर बेहतर होगा और औद्योगिक क्षेत्र में पारदर्शिता, स्थिरता और प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
“यह केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भारत के कामगारों के सुरक्षित भविष्य और मजबूत उद्योग अर्थव्यवस्था की ओर एक निर्णायक कदम है।”
— एडवोकेट महेश एस. धन्नावत

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