‘द डिप्लोमैट’ रिव्यू : इस्लामाबाद से भागने की थ्रिलिंग कहानी, लेकिन नएपन की कमी
बॉलीवुड के एक्शन स्टार जॉन अब्राहम एक बार फिर मिशन-मोड में नजर आए हैं फिल्म ‘The Diplomat’ के जरिए। फिल्म एक ऐसी कहानी को सामने लाती है जिसमें एक युवा महिला को इस्लामाबाद से सुरक्षित बाहर निकालने का जिम्मा उठाया गया है। इस थ्रिलर में राजनीतिक साजिश, पीछा, गोलीबारी और सीमापार खतरे की मौजूदगी है, लेकिन फिल्म एक परंपरागत ढर्रे पर चलती नजर आती है जो इसकी नवीनता को कम कर देती है।
■ कहानी की पृष्ठभूमि:
फिल्म की कहानी एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान घटित होती है। एक महिला, जो कुछ संवेदनशील जानकारी के साथ पाकिस्तान में फंसी होती है, उसे सुरक्षित भारत लाना होता है। यह जिम्मेदारी जॉन अब्राहम के किरदार को दी जाती है, जो एक अनुभवी राजनयिक एजेंट हैं। मिशन में सिर्फ दुश्मन एजेंसियों की चुनौती नहीं होती, बल्कि खुद सिस्टम की अंदरूनी साजिशें भी सामने आती हैं। इस भागमभाग में किसे भरोसा किया जाए और कौन है असली दुश्मन — यही कहानी का असली तनाव बनाता है।
■ अभिनय और किरदार:
जॉन अब्राहम अपने गंभीर, शांत और प्रोफेशनल एक्शन हीरो के अंदाज़ में प्रभावशाली लगते हैं। उनके किरदार में संयम और सटीकता दिखती है। महिला किरदार के रूप में दिखी अभिनेत्री ने भी भावनात्मक दृश्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन पटकथा उनके अभिनय की गहराई को पूरी तरह नहीं उभार पाई। अन्य सहायक किरदार कहानी को संतुलन देते हैं, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं जो लंबे समय तक याद रह जाए।
■ निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी और तकनीकी पक्ष:
फिल्म का निर्देशन तकनीकी रूप से सक्षम है। लोकेशन का चयन अच्छा है और बैकग्राउंड म्यूज़िक तनाव की स्थिति को बेहतर बनाता है। एक्शन सीन कुशलता से फिल्माए गए हैं। लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले में नयापन नहीं है। कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे पहले भी देखे जा चुके हों। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है लेकिन कुछ विशेष दृश्य यादगार नहीं बन पाते।
■ समीक्षा निष्कर्ष:
अगर आप एक्शन, मिशन-बेस्ड थ्रिलर और सीमापार ऑपरेशन वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो ‘The Diplomat’ एक बार देखी जा सकती है। जॉन अब्राहम का एक्शन और उनकी मौजूदगी फिल्म को मजबूती देती है। लेकिन जिन दर्शकों को कहानी में नवीनता, गहराई और अप्रत्याशित मोड़ चाहिए, उनके लिए यह फिल्म सामान्य साबित हो सकती है।
■ रेटिंग और निष्कर्ष:
फिल्म एक औसत थ्रिलर है जो केवल एक्शन के दम पर आगे बढ़ती है। इसकी पटकथा में ओरिजिनैलिटी और भावनात्मक गहराई की कमी है।
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