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भाजपा के बढ़ते जनाधार से कांग्रेस परेशान: रावसाहेब दानवे

Panel of men at a press conference seated behind a long table with microphones, audience in front, large banner in Hindi behind them

जालना: भाजपा का बढ़ता जनाधार ही कांग्रेस की असली परेशानी है और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी व कांग्रेस की ओर से बनाया गया कथित ‘फेक नैरेटिव’ तीनों चुनाव आयुक्तों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद खत्म हो गया है। यह दावा पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रावसाहेब पाटील दानवे ने जालना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान किया।

दानवे ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान का हवाला देते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाना जनता के बीच इन संस्थाओं के प्रति भरोसा कम करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन आरोपों के साथ तथ्य और ठोस आधार भी सामने रखा जाना चाहिए।

SIR को लेकर आयोग में मतभेद के दावे पर दानवे का जवाब

दानवे के मुताबिक SIR सहित चुनाव आयोग की सभी प्रक्रियाएं आपसी सहमति से हुई हैं और तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी तरह का ‘डिफरेंस ऑफ ओपिनियन’ नहीं है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत फैसले से जुड़ा नहीं था, बल्कि डेप्युटेशन पर नियुक्ति से संबंधित था। उनके अनुसार, इस पत्र को अलग तरीके से पेश कर आयोग में मतभेद होने का माहौल बनाया गया।

फॉर्म नंबर 6 को लेकर दानवे ने कहा कि इसका इस्तेमाल उसी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, जिसे अदालत ने वैध माना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

चुनावी हार के लिए आयोग को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल

दानवे ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस को चुनावी सफलता मिली, वहां चुनाव आयोग पर इसी तरह के सवाल नहीं उठाए गए। उनके मुताबिक भाजपा की जीत के बाद आयोग पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से जनता के मुद्दों पर काम करने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में तथ्य आधारित चर्चा करने की अपील की।

EVM को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना

EVM पर उठाए जा रहे सवालों का जिक्र करते हुए दानवे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और चुनाव आयोग की ओर से दी गई हैकिंग चुनौती का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि EVM को लेकर लगातार सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपने मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देकर उठाया सवाल

दानवे ने पश्चिम बंगाल के 15 विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि अगर SIR के दौरान हटाए गए मतदाता भाजपा समर्थक थे, तो उन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कैसे जीत गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में भी SIR की प्रक्रिया हुई थी और मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करने के लिए ऐसी प्रक्रिया नियमित रूप से होनी चाहिए।

शहरों में मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर भी बोले दानवे

महाराष्ट्र में मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर दानवे ने कहा कि ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में ‘नॉट फाउंड’ या दूसरे कारणों से नामों से जुड़ी समस्याएं अधिक सामने आ सकती हैं। इसका एक कारण लोगों का रोजगार और दूसरी वजहों से लगातार स्थानांतरण होना है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों के नाम गांव और शहर दोनों जगह मतदाता सूची में हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने स्तर पर BLO के माध्यम से काम किया है और दूसरे राजनीतिक दलों को भी मतदाता सूची की जांच में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनके मुताबिक, प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ-साथ राजनीतिक दलों को मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने में भी सहयोग करना चाहिए।

जालना में मौजूद रहे भाजपा के कई पदाधिकारी

कार्यक्रम में भाजपा जालना महानगर जिलाध्यक्ष भास्कर आबा दानवे, उपमहापौर राजेश राऊत, स्थायी समिति सभापति अशोक पांगारकर, पूर्व जिलाध्यक्ष रामेश्वर भांदरगे, बद्रीनाथ पठाडे, मंडल अध्यक्ष सुनील खरे, नगरसेवक अर्जुन गेही, सिद्धिविनायक मुळे, एडवोकेट रिमा खरात, वसंत जगताव, मारोती राऊत, परीक्षित शिंदे, रोहित खोडवे, तुकाराम चव्हाण, बबनराव सिरसाठ और विष्णु मात्रे समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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आधिकारिक जानकारी

मतदाता सूची के SIR और Form 6 से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग के Voter Service Portal को देखें। आयोग की SIR से जुड़ी जानकारी ECI Publications पर भी उपलब्ध है। SIR से संबंधित न्यायिक पृष्ठभूमि के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।

नोट: इस खबर में चुनाव आयोग, SIR, EVM और राजनीतिक दलों से जुड़े दावे संबंधित नेता के बयान और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। जहां किसी राजनीतिक नेता या दल के आरोप/दावे हैं, उन्हें उसी रूप में दर्ज किया गया है।

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Imran Siddiqui

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