NewsNation Online

News That Informs. Stories That Matter.

विराट कोहली ने जब 30 दिन तक नहीं छुआ था बल्ला: मानसिक दबाव, ब्रेक और खुद को समझने की उनकी सीख

Informational thumbnail: A male Indian cricketer in a blue jersey looks upward pensively; on the right, another image of him sitting with a bat at sunset. Hindi headline about not batting for 30 days and dealing with mental pressure.
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

नई दिल्ली: मैदान पर विराट कोहली की पहचान ऊर्जा, आक्रामकता और मानसिक मजबूती से जुड़ी रही है। लेकिन उन्होंने खुद एक ऐसे दौर के बारे में खुलकर बताया था, जब लगातार क्रिकेट, अपेक्षाओं और मानसिक थकान के बीच उन्हें खेल से पूरी तरह दूरी बनानी पड़ी। अगस्त 2022 में एशिया कप से पहले Star Sports से बातचीत में कोहली ने कहा था कि लगभग दस साल में पहली बार उन्होंने करीब एक महीने तक बल्ला नहीं छुआ। यह बयान अब मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा के संदर्भ में फिर सुर्खियों में है।

विराट कोहली मानसिक स्वास्थ्य और ब्रेक पर बात करते हुए फीचर फोटो
विराट कोहली फोटो ICCGetty Images संदर्भ चित्र

‘30 दिन तक बल्ला नहीं छुआ’—क्या था पूरा संदर्भ?

ICC की 27 अगस्त 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहली ने बताया था कि उन्होंने करीब 30 दिनों तक बल्ले को हाथ नहीं लगाया। उनके मुताबिक शरीर रुकने का संकेत दे रहा था और दिमाग भी ब्रेक लेकर पीछे हटने को कह रहा था। उन्होंने यह भी माना कि वे अपनी सामान्य तीव्रता को बनाए रखने के लिए खुद को धकेल रहे थे, जबकि भीतर से वैसा महसूस नहीं कर रहे थे।

यह दौर उनके लिए सिर्फ खराब फॉर्म का सवाल नहीं था। उन्होंने अभ्यास के लिए उत्साह कम होने और खुद को उस माहौल से कुछ समय दूर करने की जरूरत महसूस होने की बात कही थी। एक महीने के ब्रेक के बाद उन्होंने खुद को हल्का और फिर से ट्रेनिंग के लिए उत्साहित महसूस करने का जिक्र किया।

‘हर किसी की एक सीमा होती है’

कोहली की बात का सबसे अहम हिस्सा मानसिक मजबूती की सीमा को पहचानना था। उन्होंने कहा था कि लोग उन्हें मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति मानते हैं, लेकिन हर किसी की एक सीमा होती है। उस सीमा को लगातार नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह किसी चिकित्सकीय निदान का बयान नहीं था, बल्कि उनके अपने अनुभव का वर्णन था।

कमजोर महसूस करने की बात स्वीकार करना क्यों अहम?

खेल की दुनिया में खिलाड़ियों से लगातार मजबूत बने रहने की उम्मीद की जाती है। कोहली ने इसी दबाव पर बात करते हुए कहा था कि मानसिक रूप से नीचे महसूस करना इंसानी अनुभव है और इस पर बात की जा सकती है। उनका संदेश था कि केवल मजबूत दिखने की कोशिश करने के बजाय अपनी स्थिति को पहचानना और भरोसेमंद लोगों से बात करना बेहतर हो सकता है।

इस अनुभव को हर व्यक्ति पर एक जैसा लागू नहीं किया जा सकता। लगातार उदासी, चिंता, नींद या रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी जैसी समस्याएं बनी रहें तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना उचित है। NewsNationOnline पर भारत में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और सहायता सेवाओं की जानकारी भी पढ़ी जा सकती है।

काम ही पूरी पहचान नहीं

कोहली ने उस बातचीत में एक और महत्वपूर्ण बात कही थी—जिंदगी सिर्फ पेशे तक सीमित नहीं है। जब किसी व्यक्ति को आसपास के लोग केवल उसकी पेशेवर पहचान से देखने लगते हैं, तो वह खुद को भी उसी नजर से देखने लग सकता है। बड़े खिलाड़ियों, कलाकारों, अधिकारियों या किसी भी उच्च-दबाव वाले पेशे में यह अनुभव अलग-अलग रूप में सामने आ सकता है।

इसी संदर्भ में ब्रेक का अर्थ जिम्मेदारियों से भागना नहीं है। सही समय पर आराम, नींद, परिवार या दोस्तों के साथ समय और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता—ये सभी व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी हो सकते हैं।

ब्रेक के बाद क्या हुआ था?

2022 एशिया कप में वापसी के बाद कोहली ने फिर लय हासिल की। ICC के अनुसार वह टूर्नामेंट में 276 रन बनाकर दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे और अफगानिस्तान के खिलाफ नाबाद 122 रन की पारी के साथ लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय शतक भी लगाया। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि हर मानसिक स्वास्थ्य समस्या का समाधान केवल छुट्टी है; लेकिन कोहली के अपने मामले में दूरी और रिकवरी ने उन्हें खेल के प्रति उत्साह वापस पाने में मदद की थी।

2026 में भी ब्रेक और मानसिक ताजगी की बात

ब्रेक की उपयोगिता पर कोहली का नजरिया बाद के वर्षों में भी दिखाई दिया। 2026 IPL के दौरान उन्होंने अतिरिक्त विश्राम के बाद मानसिक रूप से तरोताजा होकर लौटने की बात कही। यानी 2022 की बातचीत को आज साझा करते समय यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि मूल बयान चार साल पुराना है, लेकिन खिलाड़ी के लिए शारीरिक और मानसिक रिकवरी का विषय लगातार प्रासंगिक रहा है।

युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए क्या सीख?

कोहली के अनुभव को प्रेरक कहानी के रूप में देखा जा सकता है, इलाज के नुस्खे के रूप में नहीं। मुख्य सीख यह है कि लगातार प्रदर्शन का दबाव होने पर भी थकान के संकेतों को अनदेखा न किया जाए, भावनाओं पर भरोसेमंद लोगों से बात की जाए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद ली जाए। मानसिक स्वास्थ्य में हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है।

विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट से जुड़ी हमारी पिछली रिपोर्ट 2027 ODI World Cup और विराट कोहली के अभियान पर भी पढ़ें।

स्रोत

मूल बयान और 2022 के संदर्भ के लिए ICC की रिपोर्ट तथा 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित Navbharat Times फीचर का संदर्भ लिया गया है।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों पर आधारित है। इसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिकित्सकीय सलाह या किसी व्यक्ति के वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य का आकलन न माना जाए।

Informational thumbnail: A male Indian cricketer in a blue jersey looks upward pensively; on the right, another image of him sitting with a bat at sunset. Hindi headline about not batting for 30 days and dealing with mental pressure.

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading