पूर्वजों की स्मृति को सेवा का स्वरूप: मुक्तिधाम में 12 फीट ऊंची भव्य शिवमूर्ति का लोकार्पण

Group of people posing in front of a large blue statue outdoors; a Hindi banner is displayed at the bottom.

मालेगांव (जिला वाशिम): पूर्वजों की स्मृतियां केवल तस्वीरों और शब्दों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के काम आने वाली सेवा के रूप में हमेशा जीवित रहें—इसी सोच को तिवारी परिवार ने मालेगांव के मोक्षधाम (मुक्तिधाम) में साकार किया है। स्वर्गीय पत्रकार सुरेशचंद्र तिवारी और स्वर्गीय पत्रकार डॉ. राजेंद्रप्रसाद तिवारी की पावन स्मृति में यहां 12 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य मूर्ति स्थापित की गई। 2 अक्टूबर को भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण में इसका विधिवत लोकार्पण किया गया।

शिवमूर्ति की स्थापना के साथ ही मुक्तिधाम परिसर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण भी किया गया है। इस पहल ने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा को समाजसेवा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

मंत्रोच्चार के बीच हुआ शिवमूर्ति का लोकार्पण

समारोह का शुभारंभ पंडित योगेश शर्मा के वेदोक्त मंत्रोच्चार और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ हुआ। नरेंद्रकुमार तिवारी, श्रीमती प्रेमलता नरेंद्रकुमार तिवारी तथा तिवारी परिवार के सदस्यों ने भगवान शिव की भव्य आसीन मूर्ति का विधिवत लोकार्पण किया। इस दौरान ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से मुक्तिधाम परिसर गूंज उठा।

शांत वातावरण के बीच स्थापित भव्य शिवमूर्ति अब परिसर का प्रमुख आकर्षण बन गई है। अंतिम यात्रा के इस स्थल को श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिकता से जोड़ने का तिवारी परिवार का प्रयास समारोह में उपस्थित लोगों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बना।

Group of people posing in front of a large blue statue of a seated Hindu deity decorated with flower garlands outdoors.

पौराणिक चित्रों और श्लोकों से सजी दीवारें

मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण के तहत परिसर की दीवारों को भी नया स्वरूप दिया गया है। दीवारों पर हिंदू पुराणों से जुड़े देवी-देवताओं के आकर्षक चित्रों के साथ पवित्र श्लोक अंकित किए गए हैं। इन श्लोकों को ‘दैनिक भास्कर’ के पत्रकार राम राजेंद्रप्रसाद तिवारी ने लिखा है। चित्रों और श्लोकों के माध्यम से परिसर में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और अध्यात्म की झलक दिखाई देती है।

नागरिकों की सुविधा के लिए यहां लगी बेंचों को भी रंग-रोगन कर व्यवस्थित किया गया है, जिससे पूरे परिसर को स्वच्छ और आकर्षक स्वरूप मिला है।

पीपल, बरगद और नीम लगाकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

तिवारी परिवार ने इस पहल को केवल धार्मिक और सौंदर्यीकरण के कार्य तक सीमित नहीं रखा। पर्यावरण संरक्षण को इससे जोड़ते हुए परिसर में पीपल, बरगद और नीम के पौधे भी लगाए गए। भारत सरकार का ग्रीन इंडिया मिशन भी वृक्ष और वन आवरण बढ़ाने तथा पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर जोर देता है। गणमान्य नागरिकों के हाथों हुए इस पौधरोपण के जरिए श्रद्धा के साथ प्रकृति की सेवा का संदेश दिया गया। NewsNationOnline पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ऐसी स्थानीय पहलों को भी लगातार प्रमुखता दी गई है।

स्मृतियों को समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ने की पहल

तिवारी परिवार की इस पहल ने यह संदेश दिया कि पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि उनके संस्कारों और स्मृतियों को समाजहित के कार्यों में आगे बढ़ाकर भी दी जा सकती है। शिवमूर्ति की स्थापना, परिसर का जीर्णोद्धार, नागरिक सुविधाओं में सुधार और पौधरोपण के माध्यम से स्मृतियों को एक स्थायी सेवाकार्य का स्वरूप दिया गया है।

समारोह में मोक्षधाम समिति के संकल्प प्रमुख प्रेमरत्न भूतड़ा, नरेंद्रकुमार तिवारी, रामबाबू मुंदड़ा, राधाकिसन मानधने, रमेश मानधने, डॉ. सुशील भांगड़िया, श्रीकिसन मानधने, प्राचार्य दिनेश उंटवाल, ओमप्रकाश चांडक, प्रवीण काबरा, वरिष्ठ डॉ. विजयकुमार सोनोंने, कमल कासट, रमेश भूतड़ा, कचरू वर्मा, परसराम दहात्रे और अरुण भूतड़ा उपस्थित रहे।

वाशिम से अनिल व्यास, श्रीमती रानी व्यास, प्रतीक व्यास, डॉ. प्रेमलता व्यास और एडवोकेट सोमेश व्यास विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके अलावा गणेश तिवारी, राम तिवारी, रवींद्र (पप्पू) तिवारी, आशिष उ. तिवारी, नितिन यादव और पिंटू भाऊ घुगे सहित शहर के सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

श्रद्धा से आगे बढ़कर सेवा की मिसाल

तिवारी परिवार की यह पहल पूर्वजों की स्मृति, भगवान शिव के प्रति आस्था, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा का सुंदर संगम बनी है। मुक्तिधाम में स्थापित शिवमूर्ति केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अपनों की स्मृतियों को समाज के लिए उपयोगी कार्यों में बदलकर लंबे समय तक जीवंत रखा जा सकता है।

पूर्वजों की याद में किया गया एक सकारात्मक कार्य यदि समाज, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी बन जाए, तो वही श्रद्धांजलि प्रेरणा में बदल जाती है। मालेगांव के मुक्तिधाम में तिवारी परिवार की यह पहल इसी भावना की एक मिसाल बनकर सामने आई है। वाशिम और महाराष्ट्र से जुड़ी अन्य खबरों के लिए NewsNationOnline की वाशिम से जुड़ी रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।

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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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