नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026।
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर निकले विपक्षी मार्च को दिल्ली पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग के जरिए रोक दिया। कई प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं।
क्या हुआ और विवाद क्या है?
मार्च में शामिल विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे मतदाता सूची के SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर न्यायालय तक जाना चाहते थे। उनका आरोप है कि सुरक्षा प्रतिबंधों से शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार प्रभावित हुआ।
पुलिस ने राजधानी के संवेदनशील इलाके में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की थी। किसी विशिष्ट हिरासत या बल प्रयोग के कानूनी औचित्य का निर्धारण उपलब्ध रिकॉर्ड और न्यायिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार मार्च का बड़ा हिस्सा बैरिकेड से आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन विपक्ष की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस तरह प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया समानांतर चले।
आगे क्या होगा?
संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध संभव हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता और अनुपातिकता महत्वपूर्ण सवाल होते हैं।
प्रदर्शन के दौरान हुई कथित ज्यादतियों और हिरासत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस का विस्तृत आधिकारिक जवाब आवश्यक है। बिना पुष्ट जानकारी के किसी व्यक्ति के घायल होने या गिरफ्तार होने का दावा नहीं किया जाना चाहिए।
आगे की रिपोर्टिंग में पुलिस के आदेश, अदालत के निर्देश और प्रदर्शनकारियों के प्रत्यक्ष विवरण की तुलना महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस कार्रवाई पर कौन से सवाल उठते हैं?
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक रूप से संरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कानून के अनुसार प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि लागू प्रतिबंधों का आधार क्या था, उनकी अवधि कितनी थी और क्या वे घोषित सुरक्षा उद्देश्य के अनुपात में थे। किसी कथित बल प्रयोग या हिरासत की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड और प्रत्यक्ष साक्ष्य आवश्यक हैं।
मार्च रोका गया, कानूनी कार्रवाई जारी
भगवान दास रोड पर मार्च को रोकना और अदालत में याचिका दाखिल होना अलग घटनाक्रम हैं। प्रदर्शनकारियों की मांगों का न्यायिक मूल्यांकन संबंधित याचिका, उसके दस्तावेजों और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगा। पाठकों को किसी राजनीतिक आरोप को न्यायालय के स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
संपादकीय सूचना: इस रिपोर्ट में राजनीतिक पक्षों के आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। चित्र प्रतीकात्मक हो सकता है; इसे घटना की वास्तविक फोटो न समझें।
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- सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिका
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स्रोत: Reuters | Indian Express | Hindustan Times | Indian Express Metro
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