जालना, 9 सितंबर 2026. गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर अगर प्रशासन आखिरी समय में सक्रिय होता है, तो गणेश मंडलों और मूर्तिकारों के सामने कई व्यावहारिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं. यही वजह है कि पड़ोसी राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में गणेशोत्सव को लेकर करीब एक महीने पहले किए गए नियोजन को महाराष्ट्र के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण माना जा रहा है.
हैदराबाद पुलिस ने गणेशोत्सव से करीब एक महीने पहले ही गणेश उत्सव समिति के साथ बैठक कर सुरक्षा से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए थे. सड़कों के ऊपर मौजूद बिजली की तारों और बड़े वाहनों की ऊंचाई को ध्यान में रखते हुए गणेश प्रतिमाओं की ऊंचाई 15 फुट के भीतर रखने की अपील की गई थी. समय रहते जानकारी मिलने से गणेश मंडलों और मूर्तिकारों को प्रतिमा तैयार करने से पहले ही जरूरी फैसले लेने का मौका मिल गया.
जालना में बैठक हुई, लेकिन पहले तैयारी होती तो ज्यादा फायदा
जालना में भी गणेश मंडलों के साथ प्रशासन की बैठक हुई. प्रशासन का मंडलों से सीधे संवाद करना सकारात्मक कदम है, लेकिन बैठक उस समय हुई जब अधिकांश मंडल प्रतिमाओं की बुकिंग और दूसरी तैयारियां पूरी कर चुके थे.
इसी मुद्दे को लेकर वरिष्ठ विधिज्ञ एडवोकेट महेश धन्नावत ने प्रशासन को पत्र देकर सभी गणेश मंडलों की संयुक्त बैठक समय रहते आयोजित करने की मांग की थी. उनका कहना है कि गणेशोत्सव की तैयारियां कई महीने पहले शुरू हो जाती हैं. इसलिए सुरक्षा से जुड़े नियम भी काफी पहले स्पष्ट होने चाहिए.
प्रतिमा बुकिंग से पहले स्पष्ट हों सुरक्षा नियम
गणेश मंडलों को प्रतिमाओं की बुकिंग कई महीने पहले करनी पड़ती है. ऐसे में अगर प्रतिमा की ऊंचाई या मिरवणूक मार्ग से जुड़े नियम उत्सव के कुछ दिन पहले सामने आते हैं, तो मंडलों और मूर्तिकारों के लिए अपनी तैयारियों में बदलाव करना मुश्किल हो सकता है.
अगर प्रशासन गणेशोत्सव खत्म होने के तुरंत बाद अगले वर्ष की तैयारी शुरू कर दे, तो मंडलों और मूर्तिकारों को पर्याप्त समय मिल सकता है. बिजली की तारों की ऊंचाई, प्रतिमाओं की अधिकतम ऊंचाई, मिरवणूक मार्ग, वाहनों की ऊंचाई और दूसरे सुरक्षा मानकों पर पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं.
हैदराबाद की व्यवस्था से महाराष्ट्र को मिल सकता है फायदा
गणेशोत्सव महाराष्ट्र की पहचान से जुड़ा बड़ा सार्वजनिक उत्सव है. ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी पहले से योजना बनाने की जरूरत है.
हैदराबाद पुलिस की ओर से अपनाई गई समयबद्ध योजना का अध्ययन कर महाराष्ट्र में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों और बड़े शहरों के प्रशासन के साथ विचार-विमर्श कर सुरक्षा के बेहतर तरीकों को अपनाया जा सकता है.
प्रशासन, मंडल और मूर्तिकारों के बीच हो पहले से तालमेल
समय रहते बैठक होने से प्रशासन को भी अपनी तैयारियां करने का पर्याप्त समय मिलेगा और गणेश मंडलों को भी नियमों के अनुसार योजना बनाने में आसानी होगी. इससे प्रतिमा तैयार करने वाले मूर्तिकारों को भी अंतिम समय में बदलाव करने की परेशानी से बचाया जा सकता है.
गणेशोत्सव समाप्त होते ही अगले साल के लिए समन्वय बैठक आयोजित करने से एक ऐसी व्यवस्था तैयार हो सकती है, जिसमें प्रशासन, गणेश मंडल, मूर्तिकार, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभाग पहले से एक ही मंच पर हों.
समय पर किया गया यह नियोजन न केवल संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है, बल्कि अगले वर्ष का गणेशोत्सव और सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

