जालना. राज्य में सूखे जैसी स्थिति से आर्थिक संकट में फंसे किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से घोषित संशोधित आपदा मदद दरें अपर्याप्त हैं. यह राय शिवसेना के सचिव डॉ. संजय लाखेपाटील ने जताई है. उन्होंने मांग की है कि मौजूदा मदद में कम से कम दोगुनी बढ़ोतरी हो और राज्य सरकार भी केंद्र के संशोधित मानकों से कम से कम दोगुनी मदद दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में जमा करे.
सूखा प्रभावित किसान मदद का यह मुद्दा जालना समेत पूरे मराठवाड़ा के किसानों के लिए अहम है.
केंद्र की नई दरें क्या हैं
डॉ. लाखेपाटील के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) की 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए मदद दरों में बढ़ोतरी की है. इसके तहत प्रति हेक्टेयर ये दरें तय की गई हैं:
- बारिश पर निर्भर (असिंचित) खेती: 11 हजार रुपये
- सिंचित खेती: 22 हजार रुपये
- बहुवर्षीय फलबाग: 30 हजार रुपये
उनका कहना है कि खेती की लागत, बढ़ती महंगाई, बीज, खाद, दवाइयों और जुताई के खर्च को देखते हुए यह मदद बहुत कम है.
केंद्र और राज्य से क्या मांग की गई
डॉ. लाखेपाटील ने मांग की है कि केंद्र सरकार असिंचित खेती के लिए प्रति हेक्टेयर कम से कम 17 हजार रुपये, सिंचित खेती के लिए 34 हजार रुपये और बहुवर्षीय फलबाग के लिए 45 हजार रुपये की मदद मंजूर करे. इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस केंद्र के पास मजबूती से पैरवी कर बढ़ी हुई मदद मंजूर कराएं, ऐसी अपेक्षा उन्होंने जताई.
साथ ही राज्य सरकार केवल केंद्र की मदद पर निर्भर न रहकर किसानों के लिए अलग से आर्थिक मदद का फैसला ले. संशोधित मानकों की कम से कम दोगुनी दर से असिंचित खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 22 हजार रुपये, सिंचित के लिए 44 हजार रुपये और बहुवर्षीय फलबाग के लिए 60 हजार रुपये की मदद घोषित की जाए. उन्होंने यह मदद कम से कम 3 हेक्टेयर क्षेत्र तक लागू करने की मांग भी की है.
इस बारे में आधिकारिक जानकारी के लिए जालना जिला प्रशासन की वेबसाइट देखी जा सकती है.
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3 हेक्टेयर मदद का फैसला फिर से लेने की मांग
डॉ. लाखेपाटील ने याद दिलाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले प्राकृतिक आपदा के समय प्रचलित मदद मानकों से आगे जाकर 3 हेक्टेयर क्षेत्र तक मदद देने का फैसला लिया था. मौजूदा सूखे में भी उसी तर्ज पर 3 हेक्टेयर तक मदद देने का फैसला जरूरी है. किसानों के नुकसान और उनकी असल आर्थिक हालत को देखते हुए मदद की सीमा बढ़ाना समय की जरूरत है.
इन मांगों को लेकर डॉ. लाखेपाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा मंत्रिमंडल की सूखा समन्वय समिति के अध्यक्ष और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ई-मेल से विस्तृत ज्ञापन भेजा है. उनका कहना है कि सूखे के संकट में किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सीधी आर्थिक मदद चाहिए, इसलिए केंद्र और राज्य सरकार तुरंत फैसला लेकर दिवाली से पहले बढ़ी हुई मदद घोषित करें.
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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