दिवाली 2026 (लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर) से पहले बाजार में पूजा के दीयों की कई नई डिजाइनें आई हैं। इनमें मोर हैंडल वाला जर्मन सिल्वर कमल दीया खास ध्यान खींच रहा है। कमल की पंखुड़ियों के बीच बना दीया और मोर के आकार का लंबा घुमावदार हैंडल इसे पूजा की आरती और उपहार, दोनों के लिए खास बनाता है।
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कमल दीया की खासियत
- कमल के फूल जैसी नक्काशीदार चांदी-रंग की पंखुड़ियां, बीच में बाती के लिए दीया
- मोर की आकृति वाला लंबा हैंडल, जिससे आरती करते समय हाथ लौ से दूर रहता है
- नीचे लाल-नारंगी रंग का गोल बेस, जिससे दीया मंदिर में सीधा टिका रहता है
- गुलाबी मखमली डिब्बे में पैक, जो इसे दिवाली गिफ्ट के लिए तैयार बनाता है

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हिंदू परंपरा में कमल और दीये का महत्व
कमल को मां लक्ष्मी का आसन माना जाता है, इसलिए दिवाली की पूजा में कमल के फूल और कमल आकार की सजावट का खास स्थान है। वहीं दीया अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। इन दोनों को एक साथ जोड़ने वाला कमल दीया इसी वजह से त्योहार के मौसम में लोकप्रिय है।
जर्मन सिल्वर कमल दीया की देखभाल कैसे करें
जर्मन सिल्वर तांबा, निकल और जस्ता से बनी मिश्र धातु है, इसमें असली चांदी नहीं होती। इसकी चमक बनाए रखने के लिए:
- पूजा के बाद दीया ठंडा होने दें, फिर बचा तेल-घी और बाती निकाल दें।
- गुनगुने पानी और थोड़े से हल्के साबुन से धोकर तुरंत सूखे मुलायम कपड़े से पोंछें।
- कालापन आने पर नींबू के रस और बेकिंग सोडा के घोल से हल्के हाथ से साफ करें; तार वाला स्क्रबर न लगाएं।
- रखते समय डिब्बे में सूखा कपड़ा लपेटें, ताकि नमी से रंग न बदले।

दिवाली की और खबरें व गिफ्ट आइडिया पढ़ें: लाइफस्टाइल सेक्शन में।
— रश्मि बागड़ी, NewsNation Online
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