मराठवाड़ा–विदर्भ के किसानों को बड़ी राहत: जालना ड्रायपोर्ट के संचालन के लिए तीसरी बार निविदा, 29 नवंबर को साफ होगी तस्वीर
मराठवाड़ा और विदर्भ के किसानों के कृषि उत्पादों को सीधे विदेशों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जालना में लगभग दस वर्ष पहले शुरू किया गया ड्रायपोर्ट प्रकल्प अब निर्णायक मोड़ पर है। वर्षों से अधर में अटकी यह महत्त्वाकांक्षी परियोजना अब अपनी दिशा तय करने की तैयारी में है। प्रकल्प के वास्तविक संचालन तथा निर्यात–आयात की गतिविधियों के लिए तीसरी बार निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। 29 नवंबर को यह तय हो जाएगा कि आने वाले वर्षों में जालना ड्रायपोर्ट का संचालन किस कंपनी के हाथों में रहेगा।
400 एकड़ में फैला विशाल प्रकल्प, रेल लाइन तक तैयार
जालना शहर के निकट लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में यह ड्रायपोर्ट विकसित किया जा रहा है। पूरे परिसर के चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त दिनेगांव रेलवे स्टेशन से ड्रायपोर्ट तक माल ढुलाई के लिए विशेष रेल लाइन भी बिछा दी गई है, जिससे भविष्य में निर्यात सामग्री की निर्बाध आवाजाही संभव होगी।
प्रारंभिक योजना के अनुसार इस प्रकल्प का संचालन जेएनपीटी (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, मुंबई) के माध्यम से होना था, लेकिन विभागीय बदलावों और आवश्यक मंजूरियों में देरी के कारण परियोजना लंबे समय तक ठप पड़ी रही। बाद में जालना के उद्योगपतियों तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने पहल कर प्रकल्प को फिर से गति प्रदान की।
अदानी सहित बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों की निगाहें
चूंकि यह परियोजना लॉजिस्टिक्स कैटेगरी में आती है, इसलिए अदानी जैसी अनुभवी कंपनियाँ इसके संचालन में सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इससे पहले दो बार निविदाएँ जारी हुई थीं, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी।
इस बार निविदा नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट और एमएमपीएल के संयुक्त माध्यम से जारी की गई है। सूत्रों के अनुसार, जो कंपनी सर्वोच्च बोल (बिड) पेश करेगी, उसे यह प्रकल्प सौंपा जाने की संभावना सबसे अधिक है।
विशेष बात: रावसाहेब दानवे की पहल से जालना में पहले ही कस्टम क्लियरेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे निर्यात प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
पहला चरण पूरा: सड़क, वेयरहाउस, रेल ट्रैक तैयार
ड्रायपोर्ट के पहले चरण में लगभग 63 हेक्टेयर क्षेत्र में पायाभूत सुविधाएँ तैयार कर दी गई हैं। इसमें सड़क का निर्माण, वेयरहाउस, प्लेटफार्म तथा रेलवे ट्रैक शामिल हैं। इससे दिनेगांव रेलवे स्टेशन से ड्रायपोर्ट तक सीधे मालगाड़ी द्वारा माल की आवाजाही सुचारू हो सकेगी।
जिस भी कंपनी को यह निविदा दी जाएगी, उसे अगले 15 वर्षों तक पूरे परिसर की देखभाल, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।
ड्रायपोर्ट से किसानों और उद्योग को मिलने वाले संभावित लाभ
- कृषि उत्पादों की सीधे विदेशों में निर्यात सुविधा
- परिवहन लागत में कमी
- स्थानीय उद्योग और MSME को नया बाजार
- जालना और आसपास के क्षेत्र में रोजगार के अवसर
- लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने से औद्योगिक निवेश बढ़ने की संभावना
FAQ: जालना ड्रायपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
जालना ड्रायपोर्ट क्या है?
यह एक आंतरिक बंदरगाह (इनलैंड पोर्ट) है जहाँ निर्यात–आयात के लिए माल की लोडिंग–अनलोडिंग, कस्टम क्लियरेंस, वेयरहाउसिंग आदि सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
किसानों को इससे क्या फायदा होगा?
किसानों के कृषि उत्पादों का सीधे विदेशों में निर्यात संभव होगा, जिससे उन्हें बेहतर दाम और बड़े बाजार मिल सकेंगे।
यह प्रकल्प कहाँ पर बन रहा है?
जालना शहर के पास लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में यह प्रकल्प विकसित किया जा रहा है।
परियोजना कब शुरू होगी?
29 नवंबर को निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद संचालन शुरू करने वाली कंपनी तय होगी, जिसके बाद कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।
क्या कस्टम क्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध है?
हाँ, रावसाहेब दानवे की पहल से जालना में पहले ही कस्टम क्लियरेंस सुविधा उपलब्ध है।
संचालन का अनुबंध कितने वर्षों के लिए होगा?
जिस भी कंपनी को प्रकल्प सौंपा जाएगा, उसे 15 वर्षों तक इसकी देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी रहेगी।

