सामाजिक, धार्मिक और कानूनी प्रतिनिधियों ने रखी अपनी बात; 15-20 सदस्यों की समिति बनाने पर सहमति
मुंबई। महाराष्ट्र में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स (FMM) ने मुंबई में सलाह-मशविरा बैठक आयोजित की। बैठक में सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ धार्मिक, राजनीतिक और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और प्रस्तावित कानूनों को लेकर अपनी राय रखी।
बैठक में UCC को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। हालांकि, कई प्रतिभागियों ने सरकार की मंशा और इन कानूनों के संभावित असर को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि इससे एक धार्मिक समुदाय पर ज्यादा असर पड़ सकता है। प्रतिभागियों ने कहा कि कानून बनाते समय संविधान में दिए गए अधिकारों और सभी समुदायों की राय को ध्यान में रखना जरूरी है।
धार्मिक मान्यताओं में बदलाव पर भी चर्चा
बैठक की अध्यक्षता जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के केंद्रीय नेता मलिक मोअतसिम खान ने की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को अपने भीतर सुधार और आत्मनिरीक्षण की जरूरत को समझना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कुरआन और हदीस में दिए गए धार्मिक आदेश मुसलमानों के ईमान का हिस्सा हैं और उनमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
बैठक में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “हम समानता के खिलाफ नहीं हैं। हम न्याय और संविधान के साथ हैं। किसी भी बड़े कानून को बनाने से पहले अल्पसंख्यकों, दलितों और बहुजन समाज की बात भी सुनी जानी चाहिए।”
UCC पर बनेगी 15-20 लोगों की समिति
बैठक में UCC को लेकर आगे की कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। इसमें 15 से 20 सदस्यों की एक समिति बनाने पर सहमति बनी। समिति का मुख्य काम प्रस्तावित UCC का अध्ययन करना, सरकार के सामने अपनी आपत्तियां और सुझाव रखना तथा कानून के संभावित असर पर अपनी बात रखना होगा।
समिति बनने के बाद उसके सदस्यों और कामकाज की जानकारी सभी प्रतिभागियों को दी जाएगी।
10 पेज के ड्राफ्ट पर मांगे सुझाव
बैठक में UCC से जुड़े मुद्दों पर तैयार किया गया करीब 10 पेज का ड्राफ्ट भी प्रतिभागियों को दिया गया। खासकर वकीलों से इस पर सुझाव मांगे गए हैं। मिली राय के आधार पर ड्राफ्ट में जरूरी बदलाव और नए बिंदु जोड़े जाएंगे।
इसके बाद संशोधित ड्राफ्ट को महाराष्ट्र UCC समिति की अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई के सामने रखने की बात कही गई।
कई सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल
बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता यूसुफ हातिम मच्छाला, अब्दुल मुजीब शेख, अब्दुल हसीब भाटकर, मौलाना औसाफ फलाही, मुफ्ती हुजैफा, डॉ. मुनीरा कुरैशी, मौलाना निजामुद्दीन फखरुद्दीन, अधिवक्ता हूरिया पटेल, अधिवक्ता एलेन, सरदार सुखविंदर सिंह, चेनिका शाह, सरफराज आरज़ू, डॉल्फी डिसूज़ा, मोनिसा बुशरा, इरफान इंजीनियर, मौलाना महमूद दरियाबादी और अधिवक्ता कोर्डे सहित कई सामाजिक, मानवाधिकार, धार्मिक और कानूनी प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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