जालना, प्रतिनिधि। जालना शहर के विकास को लेकर महानगरपालिका की सामान्य सभा में नगरसेवक अश्विन भास्करराव अंबेकर ने कई अहम मांगें रखीं। उन्होंने नया जालना इलाके में बड़े उद्यान, जॉगिंग ट्रैक, नाट्यगृह, सभागृह और आधुनिक खेल मैदान बनाने के साथ ही मनपा की स्कूलों की हालत और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया। अंबेकर ने कहा कि शहर में विकास की काफी संभावनाएं हैं, जरूरत है तो सही योजना और इच्छाशक्ति के साथ काम करने की।
150 एकड़ से ज्यादा जमीन का हो बेहतर इस्तेमाल
अश्विन अंबेकर ने कहा कि वर्ष 2013 में जालना शहर का विकास आराखड़ा मंजूर हुआ था और इसे शासन की भी मंजूरी मिली थी। बाद में शासकीय स्तर पर हटाए गए आरक्षण को फिर से बहाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि एसआरपी के पास 150 एकड़ से ज्यादा जमीन है। इसमें करीब 25 एकड़ जमीन पर आरक्षण रखा गया था। इस जमीन का बेहतर इस्तेमाल करते हुए करीब 20 एकड़ में बड़ा गार्डन और 5 एकड़ में जॉगिंग ट्रैक बनाया जा सकता है। इसके साथ ही नाट्यगृह, सभागृह और सुसज्जित क्रीड़ांगण जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।
अंबेकर ने बताया कि इन विकास कार्यों के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का डीपीआर पुणे की एक कंपनी से उन्होंने अपने खर्च पर तैयार करवाया है। इसके लिए उन्होंने करीब 50 हजार रुपये खर्च किए हैं।
उनका कहना है कि अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो जालना शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिकों को भी घूमने, व्यायाम करने और खेलकूद के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने मांग की कि विकास कार्य पूरा होने के बाद इन सुविधाओं को आम जनता के लिए खुला रखा जाए और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी एसआरपीएफ को दी जाए।
मनपा स्कूलों में पढ़ रहे हैं गरीब परिवारों के बच्चे
नगरसेवक अंबेकर ने महानगरपालिका की स्कूलों का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि जालना शहर में मनपा की 21 स्कूलें हैं, जिनमें करीब 1,000 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। यानी औसतन एक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है।
उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में मुख्य रूप से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। इसलिए इन स्कूलों की तरफ ज्यादा गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। अंबेकर ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मनपा स्कूलों के केवल 17 प्रतिशत विद्यार्थियों में बुनियादी क्षमता का ज्ञान है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर अच्छी शिक्षा और सुविधाएं मिलें तो इन स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या काफी बढ़ सकती है। अपने संस्थान की एक स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां करीब 2,000 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। इसी तरह मनपा की स्कूलों को भी बेहतर बनाकर उनकी पहचान और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
महापुरुषों के नाम पर हों मनपा स्कूल
अश्विन अंबेकर ने महानगरपालिका की स्कूलों के नाम महापुरुषों के नाम पर रखने की भी मांग की। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिराव फुले, लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, महाराणा प्रताप और जीवा महाले जैसे महापुरुषों के नाम स्कूलों को देने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि इससे स्कूलों को नई पहचान मिलेगी और विद्यार्थियों को इन महान व्यक्तित्वों के जीवन और विचारों से प्रेरणा भी मिलेगी।

