जालना: वक्फ और देवस्थान की जमीन पर खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। इन किसानों को एग्रीस्टैक (AgriStack) में पंजीकरण, फसल पंजीकरण, कृषि ऋण, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और दूसरी सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने में आ रही दिक्कतों का अध्ययन करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक अध्ययन समिति गठित की है।
पिछले काफी समय से ऐसे किसान इस समस्या का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में जमीन उनके नाम पर नहीं होने के कारण डिजिटल कृषि व्यवस्था में फसल और किसान की जानकारी दर्ज कराने में परेशानी आती है। इसका असर सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं तक उनकी पहुंच पर पड़ता है।
गौसभाई शिरोलकर ने सरकार के सामने उठाया मामला
इस मुद्दे को लेकर वक्फ इन्स्टिट्यूशन्स फेडरेशन, महाराष्ट्र के संस्थापक अध्यक्ष गौसभाई शिरोलकर लगातार किसानों की समस्या सरकार के सामने उठाते रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर किसानों की दिक्कतों को रखा और ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें जमीन पर वास्तव में खेती करने वाले पात्र किसानों को डिजिटल कृषि प्रणाली से जोड़ा जा सके।
इसी सिलसिले में उन्होंने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा अजितदादा पवार से मुलाकात कर विस्तृत निवेदन दिया था। निवेदन में बताया गया कि आज खेती से जुड़े सरकारी लाभ लेने के लिए केवल जमीन पर खेती करना ही पर्याप्त नहीं रह गया है। फसल की डिजिटल एंट्री, एग्रीस्टैक पंजीकरण और सरकारी रिकॉर्ड में सही जानकारी दर्ज होना भी जरूरी है।
जहां जमीन का रिकॉर्ड किसी संस्था या अन्य व्यवस्था के नाम पर है और खेती कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है, वहां तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें सामने आती हैं। इस वजह से पात्र किसानों के लिए फसल ऋण, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में अड़चन पैदा हो सकती है।
एग्रीस्टैक पंजीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकार कृषि क्षेत्र को तेजी से डिजिटल व्यवस्था से जोड़ रही है। एग्रीस्टैक के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक इसका उद्देश्य कृषि से जुड़े डेटा और डिजिटल सेवाओं को बेहतर ढंग से जोड़ना तथा किसानों तक सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं की पहुंच आसान बनाना है।
ऐसे में वक्फ और देवस्थान की जमीन पर खेती करने वाले किसानों के सामने मुख्य सवाल यह है कि जब जमीन उनके नाम पर नहीं है, लेकिन वे उस जमीन पर वास्तविक रूप से खेती कर रहे हैं, तो उनकी फसल और किसान के तौर पर उनकी जानकारी सरकारी डिजिटल सिस्टम में किस तरह दर्ज की जाए। इसी तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी स्थिति का व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए अध्ययन समिति का गठन किया गया है।
समिति के सामने रहेंगे ये प्रमुख मुद्दे
- खेती करने वाले पात्र किसानों का एग्रीस्टैक में पंजीकरण किस तरह किया जाए।
- बोई गई फसल का डिजिटल फसल पंजीकरण कैसे सुनिश्चित किया जाए।
- पात्र किसानों को कृषि और फसल ऋण मिलने में आने वाली अड़चनें कैसे दूर हों।
- किसानों को फसल बीमा का लाभ देने के लिए क्या व्यवस्था हो।
- पात्र किसानों को किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि योजनाओं से जोड़ने का रास्ता क्या हो।
- जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक खेती करने वाले किसान के बीच मौजूद अंतर से जुड़े प्रशासनिक और कानूनी सवालों का समाधान कैसे निकाला जाए।
सैयद जमील मौलाना ने बताया सकारात्मक कदम
अध्ययन समिति के गठन का वक्फ इन्स्टिट्यूशन्स फेडरेशन, महाराष्ट्र के राज्य सचिव और जालना निवासी सैयद जमील मौलाना ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ और देवस्थान की जमीन पर खेती करने वाले किसानों की यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। किसान अपनी मेहनत से फसल तैयार करता है, लेकिन जमीन के रिकॉर्ड और पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण कई बार उसे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है।
सैयद जमील मौलाना ने कहा कि अध्ययन समिति का गठन इस समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत है। अब जरूरी है कि समिति किसानों की वास्तविक स्थिति को समझे और ऐसी सरल एवं व्यावहारिक व्यवस्था का सुझाव दे, जिससे पात्र किसान सरकारी योजनाओं से बाहर न रहें। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति की सिफारिशों के बाद एग्रीस्टैक पंजीकरण, फसल पंजीकरण, कृषि ऋण और फसल बीमा जैसी सुविधाओं तक किसानों की पहुंच आसान हो सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि फेडरेशन किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए आगे भी सकारात्मक प्रयास जारी रखेगा।
गौसभाई शिरोलकर ने सरकार का जताया आभार
समिति के गठन पर गौसभाई शिरोलकर ने महाराष्ट्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सुनेत्रावहिनी अजितदादा पवार के प्रति भी धन्यवाद जताते हुए कहा कि वक्फ और देवस्थान की जमीन पर खेती करने वाले हजारों किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण विषय है।
उनके अनुसार, समिति के गठन से अब इस समस्या पर सरकारी स्तर पर गंभीरता से विचार करने का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके पात्र लाभ वास्तव में मिलने तक इस मुद्दे पर कोशिश जारी रहेगी।
किसानों में बढ़ी उम्मीद
अध्ययन समिति के गठन की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित किसानों में उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, अब समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
किसानों को उम्मीद है कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करेगी, जिससे जमीन के मौजूदा रिकॉर्ड के कारण वास्तविक रूप से खेती करने वाले पात्र किसान कृषि ऋण, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं से वंचित न रहें।
इस विषय को समझने के लिए पाठक महाराष्ट्र के किसानों से जुड़ी हाल की राहत खबर भी पढ़ सकते हैं। किसान PM-KISAN की आधिकारिक वेबसाइट और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी संबंधित जानकारी देख सकते हैं।
अब नजर अध्ययन समिति की कार्यवाही, उसकी सिफारिशों और सरकार की ओर से लिए जाने वाले अगले फैसले पर रहेगी।

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