जालना, 4 नवंबर 2026 — जालना पुलिस बल के एक कांस्टेबल का अनुसूचित जनजाति (तडवी भील) का जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया है। छत्रपति संभाजीनगर की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने 5 अगस्त 2009 को जारी यह प्रमाणपत्र अवैध घोषित किया है। समिति ने आरक्षित पद पर मिली नौकरी को लेकर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जालना के पुलिस अधीक्षक को दिए हैं।

क्या है पूरा मामला
जालना पुलिस के कांस्टेबल इमरान खान अय्यूब खान तडवी (बक्कल नंबर 773, नियुक्ति परतूर) ने तडवी भील अनुसूचित जनजाति होने का दावा किया था। इस दावे की जांच छत्रपति संभाजीनगर की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने की। जांच के बाद समिति ने उनका जाति प्रमाणपत्र रद्द कर अवैध ठहराया।
शिकायत के बाद हुई जांच, स्कूल रिकॉर्ड में मिली विसंगति
शिकायतकर्ता राजेश दिलावर तडवी ने जाति वैधता प्रमाणपत्र के कथित गलत इस्तेमाल, खोटी वंशावली और दस्तावेजों में विसंगति को लेकर शिकायत की थी। समिति के सतर्कता दल की जांच में स्कूल रिकॉर्ड में जाति दर्ज करने में विसंगति पाई गई।
- मूल प्रवेश रिकॉर्ड में ‘छप्परबंद इस्लाम’ लिखा होने की बात समिति के सामने आई।
- रिश्तेदारों के स्कूल दस्तावेजों में ‘मुस्लिम’ दर्ज होने का भी समिति ने उल्लेख किया।
- इन तथ्यों के आधार पर समिति ने 2009 का प्रमाणपत्र अवैध घोषित किया।
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आगे क्या होगा
समिति ने आरक्षित पद पर मिली नौकरी के संबंध में नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश जालना पुलिस अधीक्षक को दिए हैं। महाराष्ट्र में आरक्षित पदों पर नौकरी के लिए जाति वैधता प्रमाणपत्र जरूरी होता है और जांच समिति द्वारा दावा अमान्य होने पर संबंधित विभाग नियमों के तहत कार्रवाई करता है। इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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न्यूज़ नेशन ऑनलाइन डेस्क, जालना
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