जमीयत उलेमा जालना का प्रतिनिधिमंडल एसपी से मिला, कानून की सर्वोच्चता बनाए रखने पर जोर
जालना: जालना शहर में पिछले कुछ दिनों से शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिशों के बीच
जमीयत उलेमा जालना का एक प्रतिनिधिमंडल
जिला पुलिस अधीक्षक अजयकुमार बंसल (एसपी) से मिला और स्पष्ट बातचीत की।
यह मुलाकात काजी-ए-शरीयत मुफ्ती अब्दुल रहमान के निर्देश पर की गई।
प्रतिनिधि मंडल ने गोवंश वध से जुड़ी वीडियो वायरल होने और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर गहरी नाराजगी जताई।
साथ ही कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा इन मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए बढ़ावा देकर समाजों के बीच वैमनस्य फैलाने
की साजिश पर भी ध्यान आकर्षित कराया।

जमीयत उलेमा ने कहा कि धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश नई नहीं है। पहले भी मस्जिदों पर गुलाल फेंकने और
पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया,
लेकिन संगठन ने हमेशा कानून का सम्मान किया और कभी पूरे समाज को निशाना नहीं बनाया।
महावीर चौक पर हरे झंडे के मामले में प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मुस्लिम समाज ने
पैगंबर-ए-इस्लाम (सल्ल.) की 1500वीं जयंती पर निकलने वाला जुलूस स्थगित कर दिया और बाद में रद्द भी कर दिया
ताकि शांति बनी रहे। इसके बावजूद सीसीटीवी खंभे पर लगे एक झंडे को मुद्दा बनाना अनुचित है।
जवाब में एसपी अजय बंसल ने स्पष्ट किया कि झंडा पुलिस कैमरे के खंभे पर लगाया गया था,
किसी स्तंभ पर नहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी दबाव में कार्रवाई नहीं कर रही है और आगे भी नहीं करेगी।
“निर्दोष को दंडित नहीं किया जाएगा। जो भी होगा, कानून के दायरे में होगा।”
एसपी ने जमीयत उलेमा और मुस्लिम समाज के कानून-व्यवस्था बनाए रखने में योगदान की सराहना की और
आगे भी सहयोग की उम्मीद जताई।
प्रतिनिधिमंडल में मुफ्ती फहीम, महासचिव मुफ़्ती फारूक,
मुफ़्ती सुहैल, मुफ्ती यूसुफ, वसीम शेख,
हाजी अब्दुल हमीद, हाजी शकील, सलीम भाई,
बदर चाउस, सरदार खान और अब्दुर रऊफ मौजूद थे।
जमीयत उलेमा जलना ने नागरिकों से अपील की है कि आने वाले महीनों में सतर्क रहें और किसी के बहकावे में आकर
जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें। समाज के जिम्मेदार लोग अपने क्षेत्रों में चौकस रहकर शांति बनाए रखें और
स्थिति गंभीर होने पर तुरंत शहर के जिम्मेदारों को सूचित करें।
