शादी के बाद हनीमून हर नवविवाहित जोड़े के लिए जिंदगी की सबसे खास यादों में से एक होता है। लेकिन ग्रेटर नोएडा के एक दंपत्ति के लिए यह सपना निराशा में बदल गया। ट्रैवल कंपनी की कथित लापरवाही के कारण उनका न्यूजीलैंड हनीमून प्लान आखिरी समय में बदल दिया गया और बाद में बाली में भी उन्हें खराब सुविधाओं का सामना करना पड़ा। अब जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रैवल कंपनी को 5 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
8.70 लाख रुपये में बुक किया था न्यूजीलैंड पैकेज
ग्रेटर नोएडा निवासी आकाश ने विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ न्यूजीलैंड में 10 दिन का हनीमून बिताने के लिए एक प्रतिष्ठित ट्रैवल कंपनी से 8.70 लाख रुपये का पैकेज बुक कराया था।
सभी तैयारियां पूरी थीं और पत्नी का वीजा भी जारी हो गया था, लेकिन पति का वीजा अंतिम समय तक स्वीकृत नहीं हो पाया। इसी दौरान ट्रैवल कंपनी ने न्यूजीलैंड की जगह इंडोनेशिया के बाली जाने का विकल्प दिया, जिसे दंपत्ति ने मजबूरी में स्वीकार कर लिया।
बाली पहुंचने पर भी नहीं मिली राहत
यात्रा की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। दंपत्ति जब बाली पहुंचा तो उन्हें कंपनी द्वारा बुक किया गया होटल अपेक्षित स्तर का नहीं मिला। होटल की सुविधाएं खराब होने के कारण उन्हें अतिरिक्त खर्च कर दूसरे होटल में कमरा लेना पड़ा।
जिस यात्रा को वे अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत याद बनाना चाहते थे, वह लगातार परेशानियों और असुविधाओं का कारण बन गई।
उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
भारत लौटने के बाद पीड़ित आकाश ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में उन्होंने ट्रैवल कंपनी पर वादे के अनुरूप सेवाएं न देने और मानसिक एवं आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रैवल कंपनी ने तर्क दिया कि वीजा जारी करना संबंधित दूतावास का अधिकार क्षेत्र है और इसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
आयोग ने कंपनी की दलील खारिज की
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने पाया कि ट्रैवल कंपनी की सेवाओं में स्पष्ट कमी थी। आयोग ने माना कि ग्राहक को वादे के अनुरूप यात्रा अनुभव नहीं मिला और कंपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रही।
इसके बाद आयोग ने कंपनी को 5 लाख रुपये मूल राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित एक महीने के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया।
उपभोक्ताओं के अधिकारों को मिली मजबूती
इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन और यात्रा उद्योग में ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराना कंपनियों की जिम्मेदारी है।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए भी एक संदेश है, जो सेवा में कमी या लापरवाही का सामना करने के बाद न्याय की तलाश करते हैं। साथ ही यह ट्रैवल कंपनियों को भी याद दिलाता है कि ग्राहकों के भरोसे और अनुभव के साथ किसी प्रकार की लापरवाही महंगी साबित हो सकती है।
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